आदिवासी युवक ने एक ही मंडप में दो युवतियों से रचाई शादी

कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के विश्रामपुरी थाना क्षेत्र के कोसमी गांव में एक अनूठी शादी में एक युवक ने एक ही मंडप में दो युवतियों से एक साथ विवाह के फेरे लिए। खास बात यह कि इस शादी के लिए दोनों युवतियों की रजामंदी थी। दोनों से युवक के संबंध थे, इनमें से एक दुल्हन सप्ताह भर पहले ही युवक किशोर के बेटे की मां बनी है।

यह अनोखी शादी गत शुक्रवार को संपन्न हुई। जिसमें 23 वर्षीय युवक किशोर कुमार नेताम ने गांव की ही एक 21 वर्षीया पूनम और वहां से 15 किलोमीटर दूर मारंगपुरी गांव की 20 वर्षीया युवती कविता के साथ एक साथ फेरे लिए।

दरअसल, ये पूरा मामला दोनों युवतियों से युवक के प्रेम प्रसंग का है। जिसमें कोसमी गांव की लड़की से जब किशोर ने विवाह की तैयारी की, तो खबर पाकर उसकी मारंगपुरी की प्रेमिका कविता ने इस पर आपत्ति की और किशोर कुमार के साथ विवाह का प्रस्ताव किया। इसके बाद युवक ने दोनों युवतियों से शादी करने का फैसला लिया तथा घर परिवार रिश्तेदार को परिस्थिति से अवगत कराया। स्थिति को देखते हुए युवक के मां-बाप ने भी इस फैसले पर सहमति जताई।

युवक के परिजनों ने रिश्तेदारों को बुलाकर शादी के बारे में चर्चा की तो वे भी इससे सहमत हुए। इसके बाद गोंडवाना रीति-रिवाज के साथ गांव में शादी संपन्न हुई। इस शादी में युवक के माता-पिता, दुल्हनों के माता-पिता एवं रिश्तेदार तो शरीक हुए ही गांव के लोग भी शादी में शामिल हुए।

इस अनोखी शादी के लिए बाकायदा कार्ड छपा कर लोगों को बुलाया गया था जिसमें एक तरफ वर पक्ष का नाम पता तो दूसरी तरफ क्रमशः दोनों वधुओं का नाम पता छपाया गया है। साथ ही स्वागताकांक्षी में परिवार के दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची, मौसा-मौसी सभी लोगों का नाम दर्शाया गया है। जिससे यह प्रतीत होता है कि इस शादी में सभी लोगों ने अपनी सहमति दी है।

किशोर की दोनों पत्नियों में से एक मारंगपुरी की कविता ने शादी से कुछ ही दिन पहले एक शिशु को जन्म दिया है जो सप्ताह भर का है। इस बच्चे का अभी नामकरण संस्कार तक नहीं हो पाया है। अब इसका नामकरण किया जाएगा।

अधिवक्ता और कोया समाज के बस्तर संभाग अध्यक्ष देवदास कश्यप ने बताया कि 1935 के आदिवासी लॉ में बहुपत्नी स्वीकार्य है। पर इसके लिए दोनों पक्षों व समाज की स्वीकृति होना अनिवार्य है। हिंदू लॉ में दो पत्नी रखना अस्वीकार्य है। इसमें शिकायत पर ही कार्रवाई का प्रावधान है। आदिवासियों पर हिंदू लॉ लागू नहीं होता है।