दिल्ली में पुरस्कार समारोह के साथ संपन्न हुआ फिल्मों का महाकुम्भ

नई दिल्ली। दिल्ली में तीन दिनों तक चला चित्र भारती फिल्म महोत्सव का बुधवार को पुरस्कार वितरण के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर फिल्म निदेशक सुभाष घई ने कहा कि कि देश, संस्कृति और मातृभाषा से जुडी फिल्में ही देश की पहचान होती हैं। फिल्में मनोरंजन के साथ शिक्षक की भूमिका भी निभाती है। संवेदना और जागरूकता समाज में जागृत करने का काम सिनेमा को करने की आवश्यकता है।

भोजपुरी गीतकार और सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि फिल्मों से किसी धर्म, जाति, समुदाय के लोगों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचे इसका ध्यान फिल्मकार रखे।

विक्टर बनर्जी ने कहा की हमें अपनी भाषा पर अभिमान होना चाहिए, फिल्मों से अपनी सस्कृति और मिट्टी की महक गायब नहीं होनी चाहिए। उत्तर पूर्व से आईं फिल्मकार सुश्री रिवेका ने बताया की आज फिल्मों की शूटिंग विदेशों में करने का अनावश्यक मोह से भारतीय फिल्मकार ग्रसित हैं जबकि उत्तर पूर्व सहित देश के कई भाग विदेशी लोकेशन के अधिक अच्छे हैं।

फिल्म महोत्सव में विभिन्न श्रेणियों में आई फिल्मों को पुरस्कृत किया गया। फिल्म महोत्सव में निदेशक सुभाष घई, फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रसून जोशी, संगीतकार बाबुल सुप्रियों, विक्टर बनर्जी, स्क्रिप्ट राइटर के.वी. विजयेन्द्र प्रसाद, यू.वी. कृष्णन राजू, भोजपुरी गायक मनोज तिवारी, स्पाइस जेट के चेयरमेन अजय सिंह ने विजेताओं को सम्मानित किया।

निर्णायक मंडल ने पुरस्कार के चयन के लिए भारतीय संस्कृति और उसके मूल्य, राष्ट्रीय और सामजिक जागरण, सकारात्मक कार्य, लोककला, पर्यावरण, सामाजिक समरसता और नारी सशक्तिकरण को आधार रखते हुए विजेताओं का चयन किया। बेस्ट लघु फिल्म के लिए उमेश मोहन की मराठी फिल्म अनाहूत को पुरस्कृत किया गया। बेस्ट एनीमेशन फिल्म शोल्जर्स अवर सुपर हीरो, बेस्ट डॉकुमेंट्री फिल्म आई एम जीजा, बेस्ट डायरेक्टर के लिए अनाहूत के लिए उमेश मोहन को पुरस्कृत किया गया।

चित्र भारती से जुड़े ज्यूरी सदस्यों में के.जी. सुरेश, सुदीप्तो सेन, उदय शंकर पाणी, विनोद गणात्रा, अद्वेता कला, असित कुमार गर्ग, पार्वती मेनन, उज्जवल चटर्जी, शांति प्रसाद अग्रवाल, अतुल गंगवार, कुलदीप सिन्हा, यदु विजय कृष्णन, ऋतू भारद्वाज, मीनाक्षी शेरोन तथा चित्र सिंह शामिल थे।