स्नेह या साजिश : चूरमा-चूरमा हुई ‘चूरमा पॉलिटिक्स’ या होंगे शेष ’16 संस्कार’

चूरमा
चूरमा

सिरोही। स्नेह मिलन के बहाने डिनर की आड़ में चूरमा पालिटिक्स अब जारी रहेगी या ये फिर चूरमा-चूरमा हो गई है। सिरोही जिले में बीजेपी के दबंग नेताओं द्वारा दरकिनार किए जाने से चूर-चूर हुए सपनों को लेकर घूमने वाले नेताओं की एक लम्बी फेहरिस्त है।

इनको ‘आशा’ के ‘घी’ और ‘स्नेह’ की ‘शक्कर’ से जोड़कर चूरमे को जो लड्डू बनाया गया था वो बना रहेगा या मुसीबत की पहली बारिश में ये घी और शक्कर को जोड़ चूरमे के दानों को बिखेर देगा। फिलहाल भाजपा संगठन के लोग ये व्यंग्य जरूर करते मिल जा रहे हैं कि अभी तो घर में बने चूरमे को खाने से पहले भी संगठन को जानकारी देने की इच्छा जागृत हो चुकी है।

तो क्या अब भी होंगे ’16 संस्कार’

भाजपा के सोशल मीडिया समूहों की चर्चा पर नजर डालें को सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं में जिला संगठन की निष्क्रियता और प्रेसनोट से बाहर नहीं निकल पाने की आदत ने निराशा का संचार कर दिया है। कुछ दिनों पहले एक समूह में मैसेज आया कि ‘नाकाम, नासमझ और नकारा शब्द सामने आते ही किसकी छवि सामने आती है’, इस संदेश के बाद जो जवाब आए वो जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं की निराशा का प्रदर्शन करने को काफी है।

इसी निष्क्रियता और निराशा का अंतिम संस्कार करने के लिए 16 संस्कारों की तरह जिले में सिरोही के बाद 16 स्नेह मिलन और करने की योजना भी थी। लेकिन, इस पहले स्नेह मिलन के बाद उपजे असंतोष से यह हो पाएंगे या नहीं ये भविष्य के गर्भ में है।

शिकायतें ऐसी-ऐसी

भाजपा मूल संगठन के प्रति उपजे अविश्वास की जब चर्चा चली तो एक कार्यकर्ता ने बताया कि विश्वास में रखकर विश्वासघात करना सबसे बड़ी कमी रही। संगठन में पद मिलने से ज्यादा तकलीफ इस बात को लेकर होती है कि कोई नेता खुद बीसियों चक्कर जयपुर काटने को कहे और जब काम होने की बारी आए तो इस्तीफा देने की धमकी देकर खुद ही सबसे बड़ा अडंगा पैदा कर दे। आरोप लगा दिया कि पूरा जिला संगठन एक ही मोहल्ले से ऐसे चलाने की कोशिश की जा रही है कि जिले के छह लाख वोटर्स को एक हजार लोगों की जनसंख्या वाला वो एक ही मोहल्ला साध लेगा।

लगातार…