CM राजे की गुड गवर्नेंस बेहाल : सिविल डिफेंस में पोपाबाई का राज

अजमेर। सिविल डिफेंस विभाग की अजमेर ईकाई के जिम्मेदारों का नया कारनामा सामने आया है। इस बार संपर्क पोर्टल पर न केवल शिकायत दर्ज कराने वाले को गलत जवाब दिया गया है वरन राजे सरकार की गुड गवर्नेंस को धता बताते हुए राजस्थान संपर्क अधिकारी की आंखों में भी धूल झोंकने की कोशिश की गई है। पढिए किस तरह अपनी गलतियों और सच पर पर्दा डालने की नाकाम कोशिश की गई।

प्रार्थी ने यह शिकायत दर्ज कराई

सिविल डिफेंस की अजमेर ईकाई के ही एक स्वयंसेवक ने हाल ही में जारी एक आदेश के बिंदु संख्या दो को अनुचित बताते हुए उसके खिलाफ आवाज उठाई और राजस्थान सरकार के सेवा सम्पर्क पोर्टल पर दिनांक 1 फरवरी को शिकायत दर्ज कराई गई थी कि सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगने वाले को सिविल डिफेंस की ड्यूटी प्रक्रिया से बाहर किया जाए तो उन पर किस प्रकार की कार्रवाई की जानी चाहिए। इस बारे में जानकारी मुहैया कराई जाए।

 

 

दर्ज शिकायत से हटकर ये मिला जवाब

17 फरवरी को इस सवाल का जो प्रत्युत्तर प्रार्थी को प्राप्त हुआ उसकी बानगी देखिए। नागरिक सुरक्षा विभाग से प्राप्त रिपोर्ट अनुसार परिवादी तुलसी राम नागरिक सुरक्षा का स्वयं सेवक है तथा उसे माह जनवरी 2018 में जिला त्वरित कार्यवाही दल में तैनात किया गया था। जो दिनांक 1 जनवरी 2018 से 31 जनवरी 2018 तक अपनी पारी में उपस्थित रहा है। सूचना के अधिकार से सम्बंधित कार्यालय आदेश सं 06-08 दिनांक 8-01-2018 तक जिला त्वरित कार्यवाही दल में तैनात रहा है एवं उसे हटाया नहीं गया है।

यानी पूछे गए सवाल का ऐसा जवाब जिसका सवाल से कोई लेना देना ही नहीं।आखिरकार सूचना मांगने वाले शख्स तुलसीराम नायक ने मजबूरन विभाग की पोल खोलते हुए राजस्थान सरकार को शिकायत का पत्र भेजा है।

 

प्रार्थी ने इस तरह खोली पोल

प्राथी ने दस्तावेज संलंग्न कर दावा किया है कि विभाग की ओर से जो जवाब दिया गया है वह बिल्कुल गलत है। क्योंकि आदेश सं 06-08 दिनांक 8 जनवरी 2018 को अतिरिक्त जिला कलक्टर एवं प्रभारी अधिकारी नागरिक सुरक्षा अजमेर का वह आदेश है जिसमें आरटीआई के तहत सूचना मांगने वाले स्वयं सेवकों को ड्यूटी प्रक्रिया से बाहर किए जाने की बात कही गई है। जबकि माह जनवरी दिनांक 1 जनवरी 2018 से 31 जनवरी 2018 ड्यूटी पर जिला त्वरित कार्यवाही दल में स्वयं सेवक तैनात किए जाने वाला आदेश क्रमांक 903-06, दिनांक 29 दिसंबर 2017 था, जिसमें मेरा नाम नहीं है।

इससे साफ प्रतीत होता है कि विभाग गलत सूचना देने का आदि है। मेरी ओर से पूर्व में भी लगाई गई आरटीआई में बार-बार गलत सूचना देकर गुमराह किया है साथ ही राज्य सरकार और सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगने वालों को अस्पष्ट और गलत सूचना देकर भ्रमित किया जा रहा है। प्राथी ने गलत सूचनाएं देने से जुडे जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है साथ ही सही सूचनाएं मुहैया कराने का आग्रह किया है।

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