पति की देह सामने थी, लिपट कर रो भी न सकी


अजमेर। पति की देह सामने थी लेकिन पत्नी उससे लिपट क रो भी न पाई, तीन साल का बेटा टकटकी लगाए देखे जा रहा था मानो पापा अभी उठकर गोद में भर लेंगे। बेबस माता-पिता जवान बेटे की असमय मौत से सुबके जा रहे थे। दो छोटे भाइयों का रो रोकर बुरा हाल था। ढांढस बंधाने को बढते हाथ सहसा रुक जाने को मजबूर थे। घर की हालत मुफलिसी बयां कर रही थी।

यह एक बानगी थी एनडीआरएफ में ट्रेनिंग पर गए सिविल डिफेंस के एक वालेंटियर मनोज देवल के परिवार की। मंगलवार को अजमेर में लॉकडाउन के बीच महाराष्ट्र के नागपुर से देवल की पार्थिव देह अजमेर पहुंची। सोमवार अल सुबह नागपु​र में हार्ट अटैक से देवल का निधन हो गया था। उसका शव लेकर करीब हजार किलोमीटर का सफर तय कर एम्बुलेंस सीधे धोलाभाटा में विराट नगर स्थित उसके निवास पर पहुंची।

मनोज के निधन की सूचना के बाद से ही सुबक रहे उसके परिजन एम्बुलेंस आते ही दहाडे मारकर फफक पडे। कोरोना महामारी और लाकडाउन की सख्ती के चलते आस पास रहने वाले भी सहयोग करने को नहीं आ सके। कुछ निकट के संबंधियों और मनोज के करीब रहे दोस्तों ने उसका अंतिम संस्कार विधिवत सम्पन्न कराया।

निरंकुश बना अजमेर का जिला प्रशासन

कोरोना वायरस की रोकथाम और जनता को किसी तरह की परेशानी न होने देने का दावा करने वाले जिला प्रशासन की ओर से एक युवक मौत पर बेरुखी साफ झलकी। यूं तो सिविल डिफेंस महकमा अतिरिक्त जिला कलक्टर के अधीन आता है। मृतक वारेंटियर की मौत भी प्रशिक्षण के दौरान हुई। बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन ने अपनी ओर से पीडित जरूरतमंद परिवार की कोई खैर खबर नहीं ली। औपचारिकता के नाम पर विभाग के दो कर्मचारियों को मौके पर भेज दिया। शव मृतक के घर पहुंचने के एक घंटे बाद क्षेत्र को सैनिटाइज करने के लिए दमकल आई। इस कारण अंतिम संस्कार में विलम्ब हुआ।

जो नागपुर से शव लेकर आए वे नहीं लौट पाए घर

इतना ही नहीं बल्कि लाकडाउन के निर्देशों के चलते प्रशासन ने नागपुर से शव लेकर आई एम्बुलेंस के ड्राइवर तथा साथ आए जयपुर के एक तथा अजमेर सिविल डिफेंस के दो वालेंटियर्स को होम आइसोलेट के नियम के तहत सख्ती दिखाते हुए जेएलएन अस्पताल में जांच कराने के बाद लोहागल गांव के समीप अधिग्रहीत किए गए क्वीन गार्डन में भेज दिया। एम्बुलेंस का ड्राइवर बलवीर सिंह अब अजमेर में अटक गया। जयपुर का वालेंटियर अफरार अहमद और अजमेर के ही दोनों वालेंटियर नरेश कुमार और वाहिद खान घर नहीं जा पाए।

यह भी पढें

सिविल डिफेंस का मामला : मुआवजा राशि के लिए भटक रही वालेंटियर की पत्नी