राहुल गांधी के ‘आईडिया ऑफ इंडिया’ को पलीता लगाते CM अशोक गहलोत के माउंट आबू के अधिकारी

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस द्वारा अपने ट्विटर हैंडल पर राहुल गांधी के कोट के साथ किया गया ट्वीट।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस द्वारा अपने ट्विटर हैंडल पर राहुल गांधी के कोट के साथ किया गया ट्वीट।

सिरोही। राजस्थान पीसीसी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर 22 मई को 12:34 बजे एक ट्वीट किया गया। इसमें राहुल गांधी का एक कोट है। इसमें कांग्रेस द्वारा देश का सभी नागरिकों को समान अवसर देने में विश्वास करने का दावा किया गया है। लेकिन, उसी कांग्रेस की सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर माउंट आबू में नियुक्त उपखंड अधिकारी किस तरह से आईडिया ऑफ इंडिया को पलीता लगा रहे हैं इसका सबसे बड़ा उदाहरण कड़ी दर कड़ी वहां की लिमबड़ी कोठी के निर्माण में हर तरह की छूट और आबू के आम आदमी पर उपखंड अधिकरियों द्वारा लगाई गई बंदिशों से समझेंगे।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में लिमबड़ी कोठी को माउंट आबू उपखंड अधिकारी और नगर पालिका द्वारा की जा रही विशेष मेहरबानी की वजह ये है कि इसे हाल में राजस्थान के जोधपुर बेस सत्ताधारी दो नेताओं के पुत्रों का संरक्षण मिल गया है।

कथित रूप से इस वजह से माउंट आबू उपखंड अधिकारी और नगर पालिका के आयुक्तों की विशिष्ट नियुक्तियां भी सत्ता के इन दो राजकुमारों के इसी प्रोजेक्ट को डवलप करने में हो रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि प्रदेश की राजनीति में भूचाल मचा सकने वाले इस मामले को प्रदेश भाजपा संयुक्त रूप से खेलती नजर आ रही है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण स्थानीय भाजपा मंडल अध्यक्ष और भाजपा के नेता प्रतिपक्ष की इस मुद्दे ओर चुप्पी से लगाया जा सकता है। सबगुरु न्यूज लिमबड़ी कोठी में सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी, जोनल मास्टर प्लान हर बिल्डिंग बायलॉज की अवहेलना की एक एक परत को खोलेगा, जिसमें आम जनता को गौरव सैनी से लेकर अब तक के उपखंड अधिकारियों ने कानून सम्मत होते हुए भी अधिकार देने से वंचित कर दिया और लिमबड़ी कोठी पर मेहरबानी बरसते रहे।

क्या लिखा है ट्वीट में

सबसे पहले वो ट्वीट देखिए जो प्रदेश कांग्रेस ने राहुल गांधी के कोट वाले पोस्टर के साथ किए है। ट्वीट में लिखा है कि कांग्रेस का मानना है कि देश के सभी नागरिकों को बराबरी का मौका मिलना चाहिए, किसी के साथ भेदभाव करने से देश का भला कतई नहीं हो सकता है।

इसके साथ राहुल गांधी का जो पोस्टर अटैच्ड है उसमें लिखा है कि कांग्रेस पार्टी मानती है कि हिंदुस्तान के हर नागरिक को एक जैसे अधिकार और एक जैसे मौके मिलने चाहिए। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए, अगर ऐसा नहीं होगा तो देश टूट जाएगा।

कांग्रेस सरकार की सरपरस्ती में कर क्या रहे हैं माउंट आबू के सभी एसडीएम

अशोक गहलोत सरकार द्वारा माउंट आबू में नियुक्त उपखंड अधिकारी राहुल गांधी और पीसीसी में दावों का कैसे आचार डाल रहे हैं ये पिछले तीन उपखंड अधिकारियों के कार्यकाल के उदाहरणों से समझेंगे।

सबसे पहले विवादित उपखंड अधिकारी गौरव सैनी से शुरू करते हैं। माउंट आबू के लोगों को अपने जर्जर भवन के पुनर्निर्माण और नए निर्माण का अधिकार मिल गया था। बैठक होनी थी। लेकिन सैनी ने इसमें अड़ंगा डाल दिया। इसमें उन्होंने जो एस 2 जोन के सीमांकन का बिंदू डाला वो सैनी को संदिग्ध बनाता है।

सम्भवतः आम आदमी की राहत ना मिले इसलिए जोन सीमांकन का अड़ंगा डाला। ठीक उसी समय लिमबड़ी कोठी के जोनल मास्टर प्लान में नो कंस्ट्रक्शन जोन में होने के बाद भी वो टनों में निर्माण सामग्री आवंटित करते गए। उनके समय का ईंटों के ट्रोले के पकड़े जाने का मामला तो आज भी संदिग्ध है।

इसके बाद आए दूसरे उपखंड अधिकारी भी एस टू जोन के सीमांकन का काम जयपुर से नहीं करवा पाए, लेकिन सीमांकन होने के बाद भी नो कंस्ट्रक्शन जोन में लिमबड़ी कोठी को निर्माण सामग्री अनवरत जारी करते गए।

इनके बाद आये वर्तमान उपखंड अधिकारी कनिष्क कटारिया। इन्होंने आते ही सबसे पहले माउंट आबू के आम नागरिकों के निर्माण सामग्री आवंटन पर रोक लगा दी। पूर्व में जिन लोगों को निर्माण सामग्री आवंटित करने के टोकन जारी किए गए थे, उन्हें इस दलील के साथ निर्माण सामग्री आवंटन रोक दिया कि उनका पुनरावलोकन करेंगे।

दो साल से एस टू जोन के सीमांकन का आदेश जो जयपुर में अटका हुआ था वो 25 अप्रैल को स्वीकृत होकर माउंट आबू आ गया। इस समय माउंट आबू उपखंड अधिकारी के पास नगर पालिका आयुक्त का प्रभार भी था। एक पखवाड़े से ज्यादा समय बीतने पर भी उन्होंने इसका नोटिफिकेशन जारी करवाने के लिए पत्र जारी नहीं किया जबकि पहले से ही नो कंस्ट्रक्शन जोन में नोटिफाइड लिमबड़ी कोठी को निर्माण सामग्री जारी करते रहे।

आखिर माउंट आबू उपखंड अधिकारी ही क्यों?

अब सवाल सबके दिमाग में ये कौंधेगा कि राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस के ट्वीट के विपरीत कांग्रेस शासित राज्य और कांग्रेस शासित नगर पालिका बोर्ड वाले क्षेत्र में आम आदमी और नेताओं ने बेटों के बीच भेदभाव करने का सारा ठीकरा माउंट आबू उपखंड अधिकारियों पर ही क्यों फोड़ा जा रहा है।

माउंट आबू के उपखंड अधिकारियों ने श्रंखलाबद्ध तरीके से किस तरह से सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी और हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए लिमबड़ी कोठी प्रकरण में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले निर्णय किए और आम आदमी को पर्यावरण संरक्षण के नाम पर शोषित किया इसकी हर श्रृंखला में खुलासा करेंगे।

लेकिन सबसे पहले बात उस पत्र की बात जो लिमबड़ी कोठी में बेतहाशा निर्माण के लिए उपखंड अधिकारी को सीधे तौर पर भूमिका दिखाता है। सिरोही विधायक संयम लोढ़ा ने राजस्थान विधानसभा में 1 मार्च 2021 को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिये माउंट आबू में भवन निर्माण के लिए निर्माण सामग्री जारी करने के लिए टोकन व्यवस्था खत्म करने का आग्रह किया था। इसके जवाब में स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने जवाब देते हुए टोकन व्यवस्था को माउंट आबू में अवैध निर्माण रोकने में मददगार बताया।

इसमें उन्होंने बताया कि एसडीएम को निर्माण सामग्री आवंटन का अधिकार मोनिटरिंग कमिटी ने दिया था। मंत्री ने इसी दौरान एसडीएम के एकाधिकार को खत्म करने के लिए निर्माण सामग्री आवंटन के लिए एसडीओ, आयुक्त और पालिकाध्यक्ष की समिति बना दी। इसे माउंट आबू की एक होटल व्यवसाई ने कोर्ट ने चुनौती देते हुए बाधा डाल दी। इसके पीछे भी एसडीएम कार्यालय की भूमिका बताई जाती रही थी। क्योंकि उस समय कांग्रेस और एसडीएम कार्यालय में जबरदस्त खींचतान थी। फिर वापस टोकन का एकाधिकार एसडीएम के पास आ गया।

शांति धारीवाल ने 1 मार्च 2019 को अपने जवाब में माना था कि अफसर अपनी मनमर्जी के आदि हो चुके हैं। यही मनमर्जी माउंट आबू में दिखी। आम आदमी को हक से वंचित करके राजनीतिक और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को पोषित करने का काम यहां पर टोकन वितरन व्यवस्था में किया गया।

माउंट आबू में निर्माण सामग्री का टोकन आवंटन का सम्पूर्ण अधिकार उपखंड अधिकारी के पास है ऐसे में राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस के दावों के विपरीत लिमबड़ी कोठी को टनों निर्माण सामग्री वितरण और आम आदमी को मुट्ठी भर बजरी को तरसाने का भेदभाव उपखण्ड अधिकारी के अलावा दूसरा अधिकारी कौन कर सकता है?