उदयपुर : संजीवनी क्रेड़िट सोसायटी के प्रबंध निदेशक विक्रमसिंह ईन्दोरी अरेस्ट

उदयपुर। राजस्थान में 800 करोड़ रूपए की धोखाधड़ी करने वाली संजीवनी के्रड़िट सोसायटी के प्रबंध निदेशक विक्रमसिंह ईन्दोरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार उदयपुर शहर के हिरण मगरी थाना क्षेत्र में परिवादिया उर्मिला निवासी 250 चाणक्यपुरी द्वारा विरूद्ध विक्रमसिह ईन्दोरी एवं उसकी पत्नि विनोद कुंवर ईन्दोरी एवं अन्य के विरूद्ध 20 सितम्बर 2019 को प्रकरण दर्ज कराया गया था। जिसमें आरोपी के द्वारा राजस्थान एवं गुजरात में संजीवनी क्रेडिट सोसायटी की स्थापना की और उसमें लोगों के द्वारा राशि का निवेश किया।

परिवादिया ने संजीवनी क्रेडिट सोसायटी पर खाता खुलवाकर 13 लाख 18 हजार 780 रूपए जमा कराए परन्तु तय सीमा के बाद भुगतान नहीं किया गया। रिपोर्ट में आरोप लगाया कि आरोपियों ने उक्त एफडीआर लौटाने के लिए कहा तो उक्त राशि नही लौटाई एवं झूठे वादे कर जमा राशि को ऐसो आराम में खुर्द बुर्द कर दिया गया है।

पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए अनुसंधान शुरू किया तथा जोधपुर की केन्द्रीय कारागृह में बंद आरोपी विक्रमसिंह ईंदोरी को गिरफतार कर न्यायलय में पेश कर रिमाण्ड प्राप्त किया गया। आरोपी के विरूद्ध राज्य में अन्य जिलो में 15 प्रकरण दर्ज होकर जैर अनुसन्धान है।

गौरतलब है कि आरोपी के खिलाफ प्रदेश में कई थानो में एवं इसके पदाधिकारियों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज हैं। संजीवनी क्रेडिट सोसयाटी में प्रदेश में कुल 800 करोड रूपए का निवेश किया और लोगों को राशि लौटाना शेष है। इसके द्वारा लोन देने की अलग अलग प्रकिया थी। जिसके तहत कम अवधी एवं लम्बी अवधि के जमा योजना के अलग-अलग तरह के ब्याज दिया जाता था और लोगों को लोन देने में 18 प्रतिशत के हिसाब सेे लोन की राशि वसूलते थे।

पुलिस ने बताया कि अनुसन्धान से यह बात सामने आई है कि संजीवनी केडिट सौसायटी का गठन 2008 में स्वयं विकमसिह ईन्द्रोई द्वारा किया गया था। उसके द्वारा राजस्थान जोधपुर, बाडमेर, जयपुर, कोटा, उदयपुर एवं गुजरात में आनन फानन में सजीवनी क्रेडिट सोसायटी की ब्रान्च खोली गई थी और लोगों का अधिक ब्याज का प्रलोभन देकर लाखों रूपए एफडीआर, बचत जमा योजना, फिक्स डिपोजिट के माध्यम से जमा किए गए थे।

राशि मूल खाते में जमा होती थी। उसको विक्रमसिह ईन्द्रोई स्वयं के द्वारा निकाल कर उक्त राशि को रियल स्टैट में निवेश किए गए उक्त राशि से भूखण्ड खरीदकर उसमे फ्लैट का निर्माण किया गया, उनको लोगों को बेचे गए हैं। निवेश बाडमेर जोधपुर एवं जयपुर में किया गया है।