सिरोही में सरकार से ली धर्मशाला के लिए जमीन, दुकानें बना किराये पर दी

सिरोही कलेक्ट्रेट
सिरोही कलेक्ट्रेट

सबगुरु न्यूज-सिरोही। राजस्थान राजस्व नियम 1961 के तहत जिले में कई भूमियों को स्कूल, अस्पताल, धर्मशालाओं के लिए आवंटित किया गया है। सरूपगंज के आदर्श शिक्षा समिति ही नहीं शेष कई संस्थानों ने भी इस आवंटन की शर्तों को उल्लंघन किया है।

इसी तरह की एक जांच रिपोर्ट जावाल की भी जिला कलक्टर कार्यालय में दफ्तर दाखिल चल रही है। सिरोही तहसीलदार द्वारा अप्रेल 2018 को प्रस्तुत इस रिपोर्ट में घांची समाज को धर्मशाला के लिए आवंटित भूमि पर व्यावसायिक दुकानें बनाने और उसे किराए पर देने की रिपोर्ट पेश की गई थी। लेकिन, अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद यह रिपोर्ट भी दफ्तर दाखिल हो गई।
-पूर्व कलक्टर के निर्देश पर बनी थी जिले भर में रिपोर्ट
पूर्व जिला कलक्टर संदेश नायक के निर्देश जिले के पांचों उपखण्ड अधिकारियों से इस तरह की भूमियों की रिपोर्ट तैयार करने को कहा था, आबूरोड के तेजेन्द्र प्रसाद बीएड काॅलेज के परिसर में बने शैक्षिक काॅम्पलेक्सों को इसी आधार पर सीज भी किया गया था।

इसी तर्ज भी सिरोही उपखण्ड अधिकारी के निर्देश पर सिरोही तहसील की भी रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें जावाल में क्षत्रिय घांची समाज विकास समिति का अगस्त 2000 को आवंटित की गई भूमि की जांच की गई। नायब तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद तहसीलदार सिरोही ने सिरोही कलक्टर को जो रिपोर्ट भेजी उसमें बताया गया कि घांची समाज विकास समिति को 2000 में खसरा नम्बर 255 रकबा 0ण्15 बीस्वा भूमि सशर्त आवंटित की गई थी।

आवंटन की शर्त की फाॅर्मेट के अनुसार यहां भी शर्त संख्या 4 के अनुसार इस भूमि का उपयोग धर्मशाला के लिए ही किया जाना था। वर्तमान में इस भूमि का खसरा संख्या 279 रकबा 0.1200 हैक्टेयर भूमि धर्मशाला घांची समाज विकास समिति जावाल के नाम से राजस्व रेकर्ड में दर्ज है।

रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है कि आवंटन की शर्तों के अनुसार इस भूमि का उपयोग किसी अन्य कार्य में नहीं किया जा सकता है, लेकिन संस्थान ने शर्त संख्या 4 की पालना नहीं करते हुए उक्त भूमि पर व्यावसायिक निर्माण करवाकर उसके किराये पर देकर उप पट्टे भी देने की प्रकिया शुरू कर दी है। इसकी मूल फर्द और रिपोर्ट को जिला कलक्टर को 16 अप्रेल, 2018 को ही भेज दिया गया था। मौके पर स्थित इस जमीन की वर्त्मान बाजार दर ही करोडो रुपये बताई जा रही है।
-क्या कार्रवाई होनी थी
राजस्थान भू राजस्व (स्कूल, काॅलेज, चिकित्सालय, धर्मशाला तथा सार्वजनिक उपयोग के अन्य भवन निर्माण अनाधिवासित राजकीय कृषि भूमि का आवंटन) नियम 1963 के अनुसार जो भूमि आवंटित की जाती है उसका उपयोग उसी कार्य के लिए किया जाना चाहिए जिस मद में उसका आवंटन किया गया है।

यदि आवंटन की शर्तों के अनुसार यदि भूमि को जिस उपयोग के लिए आवंटित किया गया है, वैसा ही उपयोग नहीं किया जाता है तो वह भूमि फिर से बिलानाम हो जाती है। ऐसे में जिस तरह से आबूरोड के विद्यालय की भूमि को राजसात किया गया था, उसी तरह इन दुकानों को भी राजसात किया जाना चाहिए, लेकिन रिपोर्ट जाने के तीन महीने बाद भी इस पर कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है।