विकसित देशों की तुलना में भारत पर कोरोना वायरस का असर कम

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ को लेकर शुरू से ही काफी सतर्क रही है और इससे निपटने की तैयारी आक्रामक एवं चरणबद्ध तरीके से की गई थी और इसी का नतीजा है कि कोरोना वायरस का असर विकसित देशों की तुलना मेें भारत में बहुत कम है।

विश्व में जहां कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की दर 6.65 प्रतिशत है, वहीं देश में इसकी दर मात्र 3.06 प्रतिशत है। देश में जितने सक्रिय मामले हैं, उनके मात्र 2.94 प्रतिशत मरीज ही आईसीयू में हैं।

केन्द्र सरकार, राज्यों और संघशासित प्रदेशोें ने समय रहते कोरोना वायरस से निपटने की रणनीति बना ली थी और जितने भी मामले सामने आए, तुरंत उनके क्लीनिकल मैनेजमेंट पर ध्यान दिया गया तथा उपयुक्त कंटेनेमेंट रणनीति अपनाई गई।

देश में अब तक के 45,299 संक्रमित लोग स्वस्थ हो चुके हैं और पिछले 24 घंटों में 3,002 मरीज ठीक हुए हैं जिससे मरीजों के ठीक होने की रिकवरी दर 40़ 32 प्रतिशत हो गई है। देश में इस समय कोरोना वायरस के 63,624 सक्रिय मामले हैं और ये सभी मेडिकल निगरानी में हैं।

देश में अब तक जितनी मौतें हुई हैं, उनमें 64 प्रतिशत पुरूष और 36 प्रतिशत महिलाएं हैं। आयु वर्ग के अनुसार 15 वर्ष से कम आयु समूह में हुई मौतें 0.5 प्रतिशत, 15 से 30 वर्ष के बीच 2.5 प्रतिशत, 30 से 45 वर्ष के बीच 11.4 प्रतिशत हैं।

सबसे अधिक मामले 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 50.5 प्रतिशत पाए गए हैं और जितनी मौतें हुई हैं उनमें 73 प्रतिशत मरीजों को कोरोना के साथ अन्य बीमारियां जैसे उच्च रक्त चाप, मधुमेह, दिल और गुर्दों की बीमारियां पहले से थी। चिकित्सीय भाषा में इसे को-मॉर्बिडिटी कहा जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को बाहर निकलने में सावधानी बरतनी चाहिए और बहुत आवश्यक होने पर ही वे घर से निकलें। इस समय हमें अपनी आदतों में बदलाव लाना होगा और व्यक्तिगत साफ- सफाई तथा सामाजिक दूरी के मानकों का पालन करना होगा और सामाजिक दूरी ही फिलहाल इस रोग से बचाव का है। इस समय कहीं भी बाहर निकलें तो मुंह ढक कर निकलें और खांसते तथा छींकते समय विशेष सावधानी बरतें।