कोविड-19 का सबसे बुरा दौर आना बाकी : डब्ल्यूएचओ

जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर में कोविड-19 संक्रमण का सबसे बुरा दौर आना बाकी है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. तेद्रोस गेब्रियेसस ने कहा कि संक्रमण का प्रकोप तेज हो रहा है और हम स्पष्ट रूप से महामारी के चरम पर नहीं पहुंचे हैं। वैश्विक स्तर पर मौतों की संख्या कम होती दिख रही है लेकिन वास्तव में कुछ ही देशों ने मरने वालों की संख्या कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है जबकि अन्य देशों में मौतें अभी भी बढ़ रही हैं।

डॉ. तेद्रोस ने मंगलवार को डब्ल्यूएचओ की नियमित प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि सप्ताहांत में दुनिया भर में संक्रमण के 400,000 से अधिक मामले सामने आये। विश्व भर में अब तक कोरोना के 1.14 करोड़ मामले सामने आए हैं और 5.35 लाख से अधिक लोगों की जान गई है।

उन्होंने कहा हम महामारी के शुरुआती चरण से लेकर अब तक कहते रहे हैं कि यह वायरस बहुत खतरनाक है। हमने संक्रमण के शुरुआती दिनों से ही इसे कई बार लोगों का सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया है। इसके दो खतरनाक संयोजन हैं, पहला कि यह बहुत तेजी से फैलता है और दूसरा कि इससे मौत हो सकती है इसीलिए हम चिंतित थे और दुनिया को लगातार चेतावनी दे रहे थे।

कोरोना वायरस को ‘मानवता का दुश्मन’ करार देते हुए डॉ. तेद्रोस ने कहा कि मानवता को इससे लड़ने और हराने के लिए एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एक सदी में एक बार होता है। यह एक खतरनाक वायरस है। वर्ष 1918 से इस तरह की कोई महामारी नहीं देखी गई है।

डब्ल्यूएचओ आपातकालीन स्वास्थ्य कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक डॉ. माइकल रयान ने चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर मौतों की संख्या फिर से बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि हमने जून में संक्रमितों की संख्या में तेजी देखी है हालांकि अभी तक मौतों के आंकड़ों में अधिक वद्धि नहीं हुई है। हम जानते हैं कि इसमें समय लगता है और एक अंतराल चरण होता है। हम मौत के आंकड़े फिर बढ़ते हुए देख सकते हैं।

डॉ. रयान ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में संक्रमितों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन मई के मध्य से मौतें स्थिर हैं। यह कुछ अंतराल कारक के कारण हो सकता है लेकिन अगर मौत के आंकड़े फिर बढ़ने लगे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इसके हालांकि अन्य कारक हो सकते हैं। डॉक्टरों और नर्सों ने रोगियों का प्रबंधन करना सीख लिया है और हो सकता है कि इसके कारण मौतों में कमी आयी हो।