डीके शिवकुमार ने गलत तरीके से हासिल नकदी को छिपाने की साजिश रची : ईडी

बेंगलूरु। प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के खिलाफ दायर आरोपपत्र में कहा कि उन्होंने (शिवकुमार ने) करोड़ों की बेहिसाबी नकदी छिपाने के लिए एक आपराधिक साजिश रची थी जिसे आयकर अधिकारियों ने वर्ष 2017 में दिल्ली के परिसरों से जब्त किया था।

आयकर की इस छापेमारी में 8.59 करोड़ रुपए से अधिक नगदी की बरामद की गई थी जिसके बाद आयकर विभाग ने शिवकुमार और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ कर चोरी के आरोप में बेंगलूरु की एक अदालत के समक्ष आरोप पत्र दायर किया। अन्य आरोपियों में शराब कारोबारी सचिन नारायण (45), सुनील कुमार शर्मा (46), ए हनुमंतैया और एन राजेंद्र शामिल हैं।

ईडी ने आयकर विभाग की शिकायत पर संज्ञान लिया और 2018 में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। ईडी ने 24 मई को दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत के समक्ष 60 पन्नों की अभियोजन शिकायत दर्ज की थी।

शिकायत में दावा किया गया है कि हनुमंतैया और राजेंद्र के बयान में कहा गया है कि जब्त किए गए 8.59 करोड़ रुपए शिवकुमार के हैं। इसके बाद कांग्रेस नेता ने उन्हें अपने बयान को वापस लेने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया। आरोपी ने भौतिक साक्ष्य के साथ आयकर अधिकारियों के समक्ष तलाशी के बाद की कार्रवाई में शिवकुमार से संबंधित जब्त नकदी के स्वामित्व की पुष्टि की थी।

सात महीने बीत जाने के बाद, उन्होंने उसी तारीख को अपने बयान वापस ले लिए, जब तक कि उन्होंने अपनी वापसी के लिए कोई स्थानापन्न या विश्वसनीय सामग्री प्रस्तुत नहीं की।

ईडी ने कहा कि यह आरोपी द्वारा विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन कार्यवाही के दौरान कानूनी बाधा पैदा करने का एक प्रयास था। इसमें कहा गया है कि चार अन्य आरोपियों पर अपराध की आय को छिपाने में कांग्रेस नेता की सहायता करने और उनकी मदद करने का आरोप लगाया गया है। ईडी ने यह भी कहा कि शिवकुमार ने आरोपी को कानून के दायरे में आने से बचने के लिए जब्त की गई नकदी को अपने पास रखने के लिए प्रेरित किया।

बरामद 8.59 करोड़ रुपए में से करीब 6.61 करोड़ रुपए दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव इलाके में स्थित एक फ्लैट के बेडरूम से बरामद हुए। ईडी ने अपने आरोप पत्र में कहा कि कमरे का नियंत्रण शर्मा के मृतक भाई के शिवकुमार के पास था।

आयकर छापे के दौरान कमरे की चाबी हनुमंतैया के पास से मिली थी। ईडी ने कहा कि हनुमंतैया ने एजेंसी के सामने यह बताने के लिए गवाही दी कि शिवकुमार उन्हें हर साल 1-1.5 लाख रुपए देते थे। ईडी ने कहा कि हनुमंतैया शिवकुमार के अपराध की आय को संभालने में सक्रिय रूप से शामिल था और नकदी के संग्रह, भंडारण तथा वितरण में शामिल था।

ईडी ने यह भी कहा कि एक अन्य आरोपी नारायण के पास फ्लैट से बरामद शिवकुमार से संबंधित 1.37 करोड़ रुपए हैं, लेकिन दस्तावेजी सबूतों के साथ नकदी के स्रोत को साबित करने में विफल रहे।

ईडी ने आरोप लगाया कि नारायण ने शिवकुमार की रक्षा के लिए आयकर अधिकारियों द्वारा कराधान के लिए इस राशि की पेशकश की। ईडी ने शर्मा के खिलाफ भी इसी तरह के आरोप लगाए जिन्होंने बेहिसाब नकदी को छिपाने और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इसका इस्तेमाल करने के लिए जानबूझकर शिवकुमार की सहायता की।

शिवकुमार ने 2019 में ईडी के सामने एक बयान दिया था जिसमें कहा गया था कि सफदरजंग एन्क्लेव से कर अधिकारियों द्वारा जब्त की गई 41,03,600 रुपए की राशि उनकी थी और उनकी कृषि आय से जमा हुई थी। ईडी ने कहा कि लेकिन वह भौतिक सबूतों के साथ अपने दावे को साबित करने में विफल रहे।

शिवकुमार ने पहले तर्क दिया था कि आयकर विभाग ने उनकी संपत्तियों पर इसलिए छापा मारा था क्योंकि भारतीय जनता पार्टी गुजरात से 2017 में राज्यसभा चुनाव के दौरान बेंगलूरु रिसॉर्ट में गुजरात कांग्रेस के विधायकों के वोट हासिल करने की कोशिश कर रही थी।