दादाबाडी में साध्वी मनोहरश्रीजी का 65वां दीक्षा दिवस महोत्सव संपन्न

अजमेर। गुरु विद्या दान देकर आत्म कल्याण का मार्ग बताते हैं। गुरुपूर्णिमा का चांद होता है। गुरु शिल्पकार होता है। गुरु को दिल में बसा लो तो उद्धार हो जाएगा। रावण के पास सबकुछ था लेकिन गुरु न होने के कारण उसका विनाश हुआ। मन की सुई में गुरु नाम का धागा डाल लोगे तो कभी नहीं भटकोगे।

ये विचार संगठन प्रेरिका, शतावधानी साध्वी मनोहरश्रीजी महारासा ने रविवार को दादाबाडी में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। इस अवसर पर साध्वी स्मिताप्रज्ञाश्रीजी ने कहा कि गुरु गुण जाया ना जाए और कहे बिना रहा ना जाए। अभिनंद व्यक्ति का नहीं व्यक्तित्व का होता है। गुरुवर्या मनोहरश्रीजी ने दादा गुरुदेव के नाम पर अपना जीवन समर्पित कर दिया।

प्रवक्ता रिखब सुराणा ने बताया कि साध्वी मनोहरश्रीजी के दीक्षा के 65वें साल में प्रवेश पर दादाबाडी में दो दिवसीय दीक्षा महोत्सव केे दूसरे दिन रविवार को दादा गुरुदेव की बडी पूजा ख्यातनाम संगीतकार लवेश बुरड और हिमांशु बुरड द्वारा संगीतमय धुन में पढाई गई जिसमें हापुड, चैन्नई, अहमदाबाद, बाडमेर, जयपुर, सवाईमाधोपुर, किशनगढ, ब्यावर से सैकडो अनुयायी उपस्थित थे।

संगीतकार लवेश ने गुरुवर्या मनोहरश्रीजी महारासा को 21वीं सदी की महान साध्वी बताते हुए कहा कि 16 साल की उम्र में आपने मौन एकादशी को संयम का मार्ग अंगीकार किया जिस दिवस को भारतवर्ष में 150 कल्याणक हुए हैं। गुरुवर्या मनोहरश्रीजी ने खरतरगच्छ का ही नहीं बल्कि जिनशासन का नाम पूरे देश में फैलाया है।

दादा गुरुदेव की बडी पूजा का आयोजन भीमराज-सुशीला बोहरापरिवार जयपुर निवासी की ओर से रखा गया। बडी पूजा में श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ अजमेर और श्री जिनदत्तसूरि मंडल की ओर से गुरुवर्या मनोहरश्रीजी महारासा का विक्रम पारख, सतीश बुरड, नरेन्द्र लालन, हितेश मेहता, सुशील वेद, पदमचंद सुराना के सान्निध्य में कांबली ओढाकर संयम दिवस की अनुमोदना की गई। पूजा के पश्चात दादाबाडी में ही सामूहिक भोज का आयोजन ​हुआ।

इस अवसर पर संतोषचंद सुराना, नरेन्द्र लूणिया, अनिल छाजेड, अनिल कोठारी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन, सुकेश कांकरिया एवं महेन्द्र कोठारी समेत बडी संख्या में श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे।