अजमेर : ज्योतिबा फूले की जयंती की पूर्व संध्या पर माली समाज की ओर से दीपदान

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अजमेर।
महान समाज सुधारक एवं माली सैनी समाज के गौरव महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती की पूर्व संध्या पर महात्मा ज्योतिबा फुले स्मारक दीपकों की रोशनी से जगमगा उठा। इस मौके पर सर्किल को आकर्षक लाइटों से सजाया गया।

शहर में महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती के उपलक्ष्य में दो दिवसीय कार्यक्रमों की श्रृंखला में रविवार शाम ज्योतिबा फुले सर्किल पर माली समाज की ओर से दीपदान का भव्य आयोजन रखा गया। शाम को बडी संख्या में माली समाज के लोग जुटे और करीब 8 बजे से दीपदान की शुरुआत हुई। देखते ही देखते ज्योतिबा फुले स्मारक और सर्किल दीपकों की झिलमिल रोशनी से जगमगा उठे।

खास बात यह रही कि सावित्री बाई फुले राष्ट्रीय जागृति मंच की अध्यक्ष सुनीता चौहान एवं सदस्यों की मांग पर नगर निगम की ओर से लगाई गई हाईमास्क लाइट की दूधिया रोशनी से ज्योतिबा फुले सर्किल नहा उठा।

कार्यक्रम में माली समाज के अलावा विभिन्न समाजों, संस्थाओं के लोग भी जुटे तथा महात्मा ज्योतिबा फुले के समाजसुधार के क्षेत्र में किए गए कार्यों को याद किया। राजनीतिक दलों के नेताओं, पदाधिकारियों ने भी शिरकत की। शीतल जल सेवा और जूस सेवा बालाजी वाटर वाले सोहन लाल की ओर से रही।

इस मौके पर महात्मा ज्योतिबा फुले राष्ट्रीय जागृति मंच के अध्यक्ष पूनमचंद मारोठिया, महेश चौहान, एडवोकेट बबीता टाक, चेतन सैनी, घीसू गढ़वाल, महेंद्र जादम, सुमन भाटी, सुनील भाटी, सोहनलाल तुन्दवाल, पार्षद दिलावर चौहान, बालमुकुंद टाक, रिंकू जादम, नरेंद्र तुन्दवाल, रजनीश चौहान, प्रदीप कच्छावा, गोपी किशन जादम, माखनलाल मारोठिया, हेमराज सिसोदिया, जितेंद्र मारोठिया, हेमराज खारोलिया, गंगाराम सैनी, धर्मेंद्र चौहान, तरुण जादम, रामकन्या गहलोत, रेखा गहलोत, नीतू गहलोत, इंदु अजमेरा, उर्मिला मारोठिया, विजयलक्ष्मी सिसोदिया, संतोष मौर्य, ममता चौहान, चांद तुनवाल, मनीष मारोठिया, ओम ढलवाल, चंद्रशेखर मौर्य, हेमराज बागड़ी, राजेश कुमार, तरुण जादम, ध्रुविका सिसोदिया, विजय मौर्य, अखिल तुनवाल, छीतरमल टेपन, जीके बारूपाल समेत बडी संख्या में माली समाज समेत विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कौन थे महात्मा ज्योतिबा फुले

ज्योतिराव गोविंदराव फुले भारत के महान विचारक, समाजसेवी, लेखक और दार्शनिक में गिने जाते हैं। इनका जन्म 11 अप्रेल 1827 को हुआ था। समाज में महिलाओं के उत्थान के लिए उन्होंने काफी कार्य किए। उन्होंने महिलाओं के लिए देश का पहला महिला शिक्षा स्कूल खोला था। इसके अलावा भारतीय समाज में होने वाले जातिगत आधारित विभाजन और भेदभाव के कट्टर दुश्मन थे।

उस समय महाराष्ट्र में जाति प्रथा बड़े पैमाने पर फैली हुई थी इसके लिए उन्होंने प्रार्थना समाज की स्थापना की। उन्होंने अपनी पत्नी को सावित्री को पढ़ाया और वह दूसरों को पढ़ाने लगीं। सावित्रीबाई फुले आगे चलकर देश की पहली प्रशिक्षित महिला अध्यापिका बनीं। ज्योतिराव गोविंदराव फुले की मृत्यु 28 नवंबर 1890 को पुणे में हुई। वर्ष 1888 में उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि दी गई थी।