केजरीवाल के खिलाफ उम्मीदवार को लेकर असमंजस में भाजपा और कांग्रेस

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के आठ फरवरी को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिले का अब केवल एक दिन शेष है लेकिन 21 वर्ष से सत्ता से बाहर रही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस अभी तक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है।

भाजपा ने 57 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं और दो सीटों के लिए उसका नीतीश कुमार नीत जनता दल यूनाइटेड से समझौता हुआ है। बाकी 11 सीटों पर पार्टी ने अपने उम्मीदवार अभी घोषित नहीं किए हैं जिनमें नई दिल्ली सीट भी है। नई दिल्ली सीट से केजरीवाल एक बार फिर मैदान में हैं। वर्ष 2013 में पहली बार चुनाव मैदान में उतरे केजरीवाल ने नई दिल्ली सीट से तीन बार की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित को हराया था। भाजपा ने अभी नई दिल्ली सीट से अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।

कांग्रेस को 2015 के चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी और वह इस बार अपना आधार बढ़ाने के लिए जी तोड़ प्रयास कर रही है। पार्टी ने 54 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं और चार सीटों पर उसका लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल से समझौता है लेकिन पार्टी ने भी नई दिल्ली सीट से कौन उम्मीदवार होगा, इसके अभी पत्ते नहीं खोले हैं।

कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में केजरीवाल के सामने उम्मीदवार उतारने को लेकर पेंच फंस हुआ है। कांग्रेस की तरफ से इस सीट पर शीला दीक्षित की बेटी लतिका दीक्षित को उम्मीदवार बनाने की अटकलें थीं लेकिन बताया जा रहा है कि वह चुनाव लड़ने के मूड में नहीं हैं।

भाजपा की तरफ से केजरीवाल को उनके विधानसभा क्षेत्र में ही घेरे रखने के लिए मंथन चल रहा है। मीडिया में पिछले दिनों केजरीवाल के पूर्व निकटतम सहयोगी और मंत्री रहे कपिल मिश्रा का नाम जोरों से चर्चा में आया था। वर्ष 2015 में उत्तर पूर्वी दिल्ली के करावल नगर से आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते मिश्रा काे भाजपा ने माडल टाउन से उम्मीदवार बनाया है। इसलिए पार्टी अब किसी और को ही केजरीवाल के समक्ष उतारेगी।

केजरीवाल के सामने भाजपा का उम्मीदवार कौन होगा, इनमें उनकी ही पूर्व सहयोगी शाजिया इल्मी के अलावा पिछले चुनाव में उम्मीदवार रही नुपुर शर्मा के नाम की भी चर्चा है। पिछले विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने लगभग 26 हजार वोटों से जीत हासिल की थी।