दिल्ली हाईकोर्ट ने गरीब किरायेदारों के मामले में केजरीवाल सरकार को दी दो हफ्ते की मोहलत

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अरविंद केजरीवाल सरकार को कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन की मार से परेशान दिल्ली के किरायेदारों का मकान किराया देने की नीति तैयार करने के लिए शुक्रवार को और दो सप्ताह की मोहलत दी।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना महामारी के दौरान गत वर्ष लागू लॉकडाउन के दौरान किराया देने में असमर्थ गरीबों का किराया सरकार की ओर से देने की घोषणा की थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक याचिका की सुनवाई के बाद इस घोषणा पर अमल करने का आदेश जुलाई में दिल्ली सरकार को दिया था।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 22 जुलाई के उस फैसले को निर्धारित छह सप्ताह में लागू करने संबंधी एक याचिका की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सरकार को यह राहत प्रदान की दी। दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील गौतम नारायण ने मामले को विचाराधीन होने का हवाला देते हुए दो सप्ताह और देने की गुजारिश की थी।

याचिकाकर्ताओं-करन सिंह, नजमा और रेहाना बेबी की ओर से अदालत में पेश वकील गौरव जैन ने न्यायमूर्ति रेखा पल्ली से कहा कि फैसले को छह सप्ताह में लागू करने की निर्धारित अवधि दो सितंबर को समाप्त हो गई, लेकिन इस दिशा में दिल्ली सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि किराये के भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट नीति के बिना अदालत के फैसले पर अमल कैसे किया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने 22 जुलाई के न्यामूर्ति प्रतिभा एम सिंह के फैसले का हवाला दिया, जिसमें केजरीवाल के प्रेस कांफ्रेंस में की गई घोषणा एवं वादे को कानूनी रूप से लागू करने के लिए योग्य मानते हुए सरकार को इस पर अमल करने आदेश दिया था।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के कारण देश के अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी लॉकडाउन लागू की गई थी। इस वजह से आई आर्थिक मंदी के कारण बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजी-रोजगार का संकट खड़ा गया था। ऐसे लोगों की जख्मों पर मरहम लगाने के लिए केजरीवाल ने 29 रिपीट 29 मार्च 2020 को एक प्रेस कांफ्रेंस की थी।

इस दौरान उन्होंने कहा था कि जो किरायेदार गरीबी के कारण थोड़ा-बहुत किराया नहीं दे पाएंगे, उनकी ओर से दिल्ली सरकार मकान मालिक को किराया देगी। उन्होंने मकान मालिकों से अपील करते कहा था कि वे किरायेदारों से सख्ती नहीं बरतें। साथ ही उन्होंने इस पर अमल नहीं करने वाले मकान मालिकों पर कानूनी कार्रवाई की बात भी कही थी।