दिल्ली पुलिस ने की ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक मनीष माहेश्वरी से पूछताछ

बेंगलूरु। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम गुरुवार को बेंगलूरु पहुंची और ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक मनीष माहेश्वरी से ‘कांग्रेस टूलकिट’ पर भारतीय जनता पार्टी नेताओं के ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ टैग देने को लेकर पूछताछ की।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस हाई प्रोफाइल मामले में दिल्ली और गुड़गांव में ट्विटर इंडिया के कार्यालयों की तलाशी लेने के एक हफ्ते बाद बेंगलूरु में माइक्रोब्लॉगिंग साइट के कंट्री हेड से पूछताछ की।

नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार ट्विटर इंडिया के प्रबंध निदेशक मनीष माहेश्वरी से 31 मई को दिल्ली पुलिस की टीम ने कथित ‘कांग्रेस टूलकिट’ के संबंध में पूछताछ की थी। भाजपा नेता संबित पात्रा के कथित ‘कांग्रेस टूलकिट’ पर किए गए ट्वीट को लेकर पुलिस ने ट्विटर को दो नोटिस भेजे थे।

पुलिस ने कहा कि प्रबंध निदेशक के जवाब अस्पष्ट थे और इसलिए वे तीसरा नोटिस देने के लिए ट्विटर इंडिया के कार्यालयों में गए। ट्विटर ने पात्रा के ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ के रूप में लेबल किया था, जिसमें कथित ‘कांग्रेस टूलकिट’ के स्क्रीनशॉट थे।

कांग्रेस ने उन भाजपा नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी जिन्होंने दस्तावेजों को ट्वीट किया था और दावा किया था कि ‘टूलकिट’ फर्जी था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम को 31 मई को बेंगलूरु भेजा गया जहां माहेश्वरी से पूछताछ की गई।

पुलिस की कार्रवाई की विपक्षी कांग्रेस और वाम दलों ने तीखी आलोचना की। उन्होंने सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने और डराने-धमकाने का प्रयास करने का आरोप लगाया था।

दिल्ली पुलिस के अपने कार्यालयों में जाने का विरोध करते हुए, ट्विटर ने कहा था कि वह अपने कर्मचारियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संभावित खतरे के बारे में चिंतित है। इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने ट्विटर के बयानों को ‘झूठा’, एक वैध जांच को बाधित करने और ‘संदिग्ध सहानुभूति’ मांगने के लिए डिजाइन किया गया करार देते हुए एक विज्ञप्ति जारी की थी। दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कड़े शब्दों में ट्विटर के आचरण को ‘अस्पष्ट, ध्यान भटकाने वाला और पक्षपातपूर्ण’ करार दिया था।

सरकार ने ट्विटर से ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ टैग को हटाने के लिए कहा था क्योंकि मामला कानून प्रवर्तन एजेंसी के समक्ष लंबित है और यह स्पष्ट कर दिया था कि जब तक यह मामला जांच के अधीन है, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस पर कोई निर्णय नहीं दे सकता है।