आपातकाल में जेलों में रहे ‘लोकतंत्र सेनानियों’ को पेंशन देने की मांग

बीजू जनता दल के प्रसन्ना आचार्य ने शून्यकाल
बीजू जनता दल के प्रसन्ना आचार्य ने शून्यकाल

नयी दिल्ली । देश में आपातकाल के दौरान जेलों में बंद रहे ‘लोकतंत्र सेनानियों’ को पहचान दिये जाने तथा उन्हें पेंशन देने की आज राज्यसभा में मांग की गयी।

बीजू जनता दल के प्रसन्ना आचार्य ने शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि 25 जून 1975 का दिन देश के इतिहास में काले दिवस के रूप में याद किया जाता है। आपातकाल की घोषणा के बाद लोक नारायण जय प्रकाश के नेतृत्व में विभिन्न नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसके विरूद्ध अावाज उठायी और आंदोलन किया। इसे लोकतंत्र की बहाली के लिए दूसरे ‘स्वतंत्रता संग्राम’ के तौर पर देखा जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग जेलों में बंद रहे।

उन्होंने कहा कि संघर्ष करने वालों में से कुछ लोग सत्ता तक पहुंच गये लेकिन कुछ को भुला दिया गया और अब वे बदहाली में गुमनाम जीवन जी रहे हैं। इनमें से एक व्यक्ति को वह जानते हैं जो रिक्शा चलाकर अपना गुजारा कर रहे हैं। कुछ और लोग भी जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इन लोगों को किसी तरह की पहचान देनी चाहिए और पेंशन आदि देकर इनकी मदद करनी चाहिए।

आचार्य ने कहा कि वह पहले भी यह मामला उठा चुके हैं लेकिन अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ सेनानियों के बच्चे दयनीय हालत में जी रहे हैं। उनकी भी मदद की जानी चाहिए।

कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब से बड़ी संख्या में युवाओं के विदेशों में शिक्षा लेने जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे बड़ी संख्या में हमारा पैसा विदेशों में जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अकेले पंजाब से हर साल डेढ लाख युवा बाहर पढने जा रहे हैं और उनकी शिक्षा तथा अन्य मदों पर हर साल 27 हजार करोड रूपया खर्च हो रहा है। यह पैसा चाहे कोई भी खर्च करे यह देश का पैसा है जो बाहर जा रहा है। केन्द्र सरकार को समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप कर सभी दलोंं के साथ विचार विमर्श कर कोई राष्ट्रीय नीति बनानी चाहिए । साथ ही उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए धन का आवंटन बढाने का भी सुझाव दिया।

बाजवा ने कहा कि यह भी बड़ा चिंता का विषय है कि बड़ी संख्या में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढाई के बाद बच्चे विदेशों में जा रहे हैं। सरकार को इस पर रोक लगाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने चाहिए।

माकपा की झरना दास वैद्य ने देश में पत्रकारों पर हमले की बढती घटनाओं का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक हो या जम्मू कश्मीर या त्रिपुरा कई राज्यों में भ्रष्टाचार और गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे पत्रकारों को मारा जा रहा है। उन्होंने बेंगुलूरू में मारी गयी पत्रकार गौरी लंकेश और जम्मू कश्मीर में मारे गये शुजात बुखारी पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि पत्रकारों को इस तरह निशाना बनाया गया तो मीडिया निष्पक्ष कैसे रहेगा। उन्होंने सरकार से पत्रकारों की सुरक्षा की दिशा में प्रभावशाली कदम उठाने की मांग की।

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि पत्रकार निष्पक्ष रहकर काम नहीं कर पा रहा है क्योंकि उसे डर है कि किसी रिपोर्ट पर उसकी नौकरी जा सकती है। अनेक सदस्यों ने इस मुद्दे पर अपना समर्थन जताया।

भारतीय जनता पार्टी के श्वेत मलिक ने पंजाब में फर्जी ट्रेवल एजेन्टों का मामला उठाते हुए कहा कि ये लोगों को नौकरी के लालच में अवैध तरीकों से विदेश भेजते हैं जहां उनसे मजदूरी करायी जाती है। इन लोगों से 25 से 50 लाख रूपये तक भी वसूले जाते हैं।

उन्होंने कहा कि ये एजेन्टे विदेश में शिक्षा के लालच में युवाओं को भी गुमराह करते हैं और उन्हें गलत ढंग से बाहर भेजते हैं जहां उन्हें अपने गुजारे के लिए मजदूरी करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि राज्य में इस तरह के 700 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा चल रहा है। केन्द्र को इन मामलों की जांच करानी चाहिए और किसी स्तर पर हस्तक्षेप कर इस पर रोक लगानी चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस के अहमद हसन ने बडी संख्या में किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत फसल के क्षेत्र में 25 फीसदी की कमी किये जाने से भी किसान परेशान हैं। भाजपा के सत्यनारायण जटिया ने सरकार की सबको आवास योजना की सराहना करते हुए कहा कि इसके लक्ष्यों को समय से हासिल करने के लिए केन्द्र को राज्य सरकारों के साथ विचार विमर्श कर परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना चाहिए।

भाजपा के ही विजय पाल सिंह तौमर ने फसलों के भंडारण और घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद का मुद्दा उठाया। किसानों की समस्याओं को मीडिया में उचित जगह नहीं मिलने का मामला उठाते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया को इस समस्या पर विचार विमर्श की जगह बनानी चाहिए।
भाकपा के विनय विश्वाम ने कहा कि खाडी देशों में काम कर रहे केरल के लोगों के लिए स्वदेश आना दूभर हो गया है क्योंकि एयर इंडिया सहित सभी विमान कंपनियों ने किरायों में पांच गुना तक बढोतरी कर दी है। उन्होंने इन लोगों के लिए विशेष किराये शुरू करने की मांग की।

जनता दल यू की कहकशां प्रवीण ने रेलों में खाने की खराब गुणवत्ता और अन्नाद्रमुक की विजला सत्यनाथन ने यात्रियों की सुरक्षा का मामला उठाया। मनाेनीत सकल राजभर ने उत्तर प्रदेश के बलिया में एम्स या स्नातकोत्तर मेडिकल संस्थान की स्थापना की मांग की। निर्दलीय एम पी वीरेन्द्र कुमार ने छोटे डेयरी किसानों को वित्तीय पैकेज देने की मांग की।