मोदी सरकार में ‘एक ही व्यक्ति’ बनाता है नीतियां : यशवंत सिन्हा

demonetisation has led to tax terrorism : Yashwant Sinha
demonetisation has led to tax terrorism : Yashwant Sinha

नई दिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए दावा किया कि नोटबंदी का कोई भी ‘घोषित लक्ष्य’ हासिल नहीं हो पाया है तथा इससे उल्टा ‘कर आतंकवाद’ बढ़ा है।

उन्होंने मोदी का नाम लिए बिना यह भी कहा कि इस सरकार में केवल एक व्यक्ति ही नीतियां बनाता है तथा नोटबंदी से पहले किसी को भी विश्वास में नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि इस सरकार में कई नीति निर्माता में नहीं हैं। यहाँ एक ही व्यक्ति नीतियां बनाता है।

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर अरुण कुमार की पुस्तक ‘डिमोनेटाइजेशन एंड द ब्लैकमनी’ के लोकार्पण के मौके पर सिन्हा ने मोदी और दिल्ली सल्तनत के शासक मोहम्मद बिन तुगलक का नाम लिए बिना उनकी तुलना करते हुए कहा कि इससे पहले पांच सौ साल पहले एक शासक को दिल्ली से राजधानी दौलताबाद और वापस दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए जाना जाता है। लेकिन, उसने एक काम और किया था। उसने भी प्रचलन में जारी मुद्रा को पूरी तरह बदल दिया था।

लंबे समय से मोदी सरकार के कटु आलोचक रहे पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि नोटबंदी की घोषणा के समय 8 नवंबर 2016 को सरकार ने इसके जितने उद्देश्य बताए थे, उनमें से एक भी हासिल नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि न तो भ्रष्टाचार, न ही कालाधन समाप्त हुआ है और न ही आतंकवाद में कमी आई है। उन्होंने कहा कि कुछ हद तक अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण जरूर बढ़ा है, लेकिन इसे नोटबंदी के लक्ष्यों में बाद में शामिल किया गया था।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यदि मुझसे पूछा जाता तो मैं यही कहता कि यह कदम मत उठाइये। यह विफल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि 17 महीने बाद निष्कर्ष यह है कि एक आर्थिक कदम के रूप में नोटबंदी बिल्कुल विफल हो चुकी है।

कालेधन के विशेषज्ञ कुमार ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े पूरी अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश नहीं करते। उन्होंने कहा कि जीडीपी के आंकलन में सरकार सिर्फ कॉर्पोरेट सेक्टर के आंकड़ों को शामिल करती है। इसमें संगठित क्षेत्र की भी पूरी गणना नहीं होती जबकि देश की 60 प्रतिशत अर्थव्यवस्था असंगठित क्षेत्र से संबंध रखती है।

उन्होंने कहा कि भले जीडीपी के आंकड़ों में दो-तीन तिमाहियों के बाद सुधार दिखने लगा हो, लेकिन असंगठित क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की वृद्धि नकारात्मक हो गई थी और उसे उबरने में काफी लंबा समय लगेगा। उन्होंने कहा कि सरकार के ये तर्क कि कालाधन के लिए नकदी जरूरत होती है, पूरा कालाधन रियल इस्टेट में है और कालाधन विदेशों में पड़ा है गलत थे।

प्रचलन में मौजूद 86 प्रतिशत नकदी को अमान्य कर देने से क्षमता दोहन कम हो गया है। इसका असर अगली पीढ़ी पर भी हो सकता है। समाज, अर्थशास्त्र और राजनीति पर इसका दीर्घकालीन असर होगा। अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगा है।

कुमार ने कहा कि कालेधन की समस्या राजनीतिक है और इसका हल भी राजनीतिक ही हो सकता है जिसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने आरोप लगाया कि सरकार के घोषित लक्ष्यों के अलावा नोटबंदी के दो और लक्ष्य थे।

इसमें एक कुछ राज्यों में चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर करना था जो सफल रहा। इसके अलावा उन्होंने नोटबंदी से एक साल पहले भारत के बेटर देन कैश अलायंस का सदस्य बनने की संयुक्त संसदीय समिति से जांच की मांग करते हुए कहा कि यह अमरीकी कार्ड भुगतान कंपनियों का संगठन है और भारत का इसका सदस्य बनना तथा नोटबंदी के बाद कार्डों का इस्तेमाल बढ़ने से इन कंपनियों का कमीशन बढ़ना दोनों अलग-अलग नहीं हैं।

पूर्व सांसद जय पांडा ने भी कहा कि कालाधन को समाप्त करने के लिए नोटबंदी जैसे सख्त कदम की जरूरत थी। हालांकि इससे अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर भी पड़ा था।