महिला सशक्तिकरण के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी : रामनाथ कोविंद

सिरोही। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने समाज के समग्र विकास के लिए महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण की जरूरत बताते हुए कहा है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने एवं उनकी सुरक्षा के प्रयास एवं महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के प्रेरक उदाहरण सामने आ रहे हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

कोविंद आज ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय संस्था में महिला सशक्तिकरण पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उद्यमिता एवं कौशल विकास के कार्यक्रमों के द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं और महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के प्रेरक उदाहरण भी सामने आ रहे हैं।

वर्तमान लोकसभा के लिए अब तक की सर्वाधिक संख्या में 78 महिला सांसदों का चुना जाना हमारे समाज की गौरवपूर्ण उपलब्धि है। ग्रामीण भारत में पंचायती संस्थाओं के जरिये दस लाख से भी अधिक महिलाएंए अपनी जिम्‍मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। इस तरह विभिन्न स्तरों पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में बढ़ोतरी हो रही है।

उन्होंने महिला सुरक्षा को एक गंभीर विषय बताते हुए कहा कि इस विषय पर बहुत काम हुआ है लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। बेटियों पर होने वाले आसुरी प्रहारों की वारदातें देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख देती हैं। लड़कों में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत बनाने की ज़िम्मेदारी हर माता पिता की है।

उन्होंने कहा कि बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर ने महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के पक्ष में केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया था। वह महिलाओं के सशक्तीकरण को सदैव प्राथमिकता देते थे। सब लोग मानते हैं कि शिक्षा सशक्तीकरण का आधार है।

महात्मा गांधी ने कहा था कि जब तक राष्ट्र की जननी स्वरूप हमारी महिलाएं ज्ञानवान नहीं होतीं और उन्हें स्वतन्त्रता नहीं मिलती तथा उनसे संबन्धित क़ानूनों, रिवाजों और पुरानी रूढ़ियों में अनुकूल परिवर्तन नहीं किए जाते तब तक राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता। हम देखते हैं कि आज भी हमारे देश में महिलाओं की साक्षरता दर काफी कम है। लेकिन यह प्रसन्नता की बात है कि बालिकाओं की शिक्षा को सुविधाजनक बनाया जा रहा है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं योजना के तहत कन्या भ्रूण हत्या तथा बाल विवाह को रोकने, स्कूलों में बेटियों की संख्या बढ़ाने, शिक्षा के अधिकार के नियमों को लागू करने और बेटियों के लिए स्कूलों में शौचालयों का निर्माण करने से छात्राओं को सहायता मिली है।

उन्होंने कहा कि यह एक सामाजिक सत्य है कि जब आप एक बालक को शिक्षित बनाते हैं तो उसका लाभ एक परिवार को मिलता है लेकिन जब आप एक बालिका को शिक्षित बनाते हैं तो उसका लाभ दो परिवारों को मिलता है। एक और महत्वपूर्ण सामाजिक तथ्य यह है कि शिक्षित महिलाओं के बच्चे अशिक्षित नहीं रहते। शिक्षित महिलाएं अपनी अगली पीढ़ी का बेहतर निर्माण करती हैं। नारी विकास केन्द्रित योजनाओं के कारण चाइल्ड सेक्स रेशियो में भी सुधार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि इस सुधार के लिए हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश और राजस्थान को भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया है। मुझे बताया गया है कि हरियाणा, उत्तराखंड, और उत्तरप्रदेश में चाइल्ड सेक्स रेशियो में लगभग 35 पॉइंट्स का सुधार हुआ है। यह एक बहुत महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन है। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में लिंगानुपात में 1000 बेटों पर 1003 बेटियां पैदा होना एक सुखद सामाजिक स्थिति है।

उन्होंने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण भी जरूरी है। इस दिशा में जन धन योजना कारगर साबित हुई है, जिसमें खोले गए करोड़ों खातों में से 52 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम पर हैं। यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि ब्रह्मकुमारी विश्वविद्यालय संस्थान के तकरीबन आठ हजार केंद्र लगभग 140 देशों में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में देशभर में फैले ऐसे नेटवर्क से अमूल्य योगदान मिल सकता है।