अजयमेरु प्रैस क्लब में धूमधाम से की धनतेरस पूजा

अजमेर। अजयमेरु प्रैस क्लब में सोमवार को धनतेरस पूजा विधि विधान से संपन्न हुई। पंडित जगदीश प्रसाद गौड के सान्निध्य में क्लब सदस्यों ने आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, भगवान कुबेर तथा मांग लक्ष्मी का आहवान किया।

दीपावली के उपलक्ष्य में क्लब परिसर में आयोजित धनतेरस पूजन में सदस्यों ने उत्साह से भाग लिया। मंत्रोच्चार के बीच धन्वंतरि पूजन किया गया तथा लक्ष्मीजी की आरती की गई। सभी को प्रसाद वितरण किया गया।

इस अवसर पर क्लब अध्यक्ष प्रताप सिंह सनकत, राजेन्द्र गुंजल, सत्यनारायण जाला, राजकुमार पारीक, अनिल गुप्ता, सरवर सिद्दकी, बीएस बिरदी, अकलेश जैन, विजय मौर्य, सैयद सलीम, आनंद शर्मा समेत बडी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।

धनतेरस पूजा क्यों?

दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस मनाई जाती है। धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन ही क्षीर सागर से माता लक्ष्मी और कुबरे देवता प्रकट हुए थे। इसी वजह से धनतेरस के दिन इनकी पूजा शुभ मानी जाती है। धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज की भी पूजा की जाती है। शाम को पूजा के बाद घर के बाहर एक बड़ा दीपक जलाकर रखा जाता है, उस दीपक का नाता यम देवता है।

पौराणिक कथा के अनुसार हेम नाम का एक राजा था, जिसे वर्षों बाद बहुत मुश्किलों से पुत्र प्राप्ति हुई। उस बालक की कुंडली बनाने वाले ज्योतिष ने बताया कि इसकी कुंडली में मृत्य योग है। शादी के दसवें दिन इसकी मौत हो जाएगी। यह सुनकर राजा हेम ने अपने पुत्र की शादी नहीं करना तय किया। उसने अपने पुत्र को ऐसे स्थान पर भेज दिया जहां कोई स्त्री नही थी। लेकिन उसके भाग्य में कुछ और ही था। राजा के लाख प्रयासों के बाद भी उसके पुत्र को उस स्थान पर घने जंगलों में एक सुंदर स्त्री मिली और दोनों को आपस में प्रेम हो गया। दोनों ने गंधर्व विवाह कर लिया।

भविष्यवाणी के अनुसार शादी के दसवें दिन यमदूत उसके प्राण लेने आया। यमदूत को देख उसकी पत्नी बहुत रोई। यमदूत जब प्राण लेकर यमराज के पास पहुंचा तो बेहद दुखी था। यमराज ने दूत से दुख का कारण पूछा तो उसने कहा कि कर्तव्य के आगे कुछ नहीं होगा। इस बात पर यमदूत ने यमराज से पूछा कि क्या इस अकाल मृत्यु को रोकने का कोई उपाय है?

तब यम ने कहा कि अगर कोई भी मनुष्य कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (13वें दिन) शाम के समय अपने घर के द्वार पर दक्षिण दिशा में दीपक जलाएगा तो उसके जीवन से अकाल मृत्यु का योग टल जाएगा। बस उसी दिन से धनतेरस की शाम यम की पूजा होने लगी। क्योंकि हर साल धनतेरस भी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की तेरस यानी 13वें दिन ही आती है।