ध्यानोत्सव में किया मन और आत्मा को शुद्ध

किशनगढ़। ध्यानोत्सव में रविवार को क्लेश और तनाव से मुक्ति के लिए स्वर्णिम चाबी (गोल्डन की) दी गई। मन और आत्मा को शुद्ध करने के सम्बन्ध में चर्चा करने के साथ ही इसका प्रायोगिक अनुभव भी करवाया गया।

श्री रामचन्द्र मिशन हार्टफुलनेस संस्थान के द्वारा आर के कम्युनिटी हाॅल में तीन दिवसीय ध्यानोत्सव के दूसरे दिन मस्तिष्क को विकसित करने के लिए ब्रेन एवं हृदय के मध्य आपसी समन्वय के बारे में भी बताया गया।

हार्टफुलनेस प्रशिक्षक जिग्लेश शेलत ने कहा कि रोजमर्रा के जीवन में पारिवारिक क्लेश और कार्यालयी तनाव व्यक्ति को परेशान करते हैं। कई बार हमारा मन भारी हो जाता है। विभिन्न प्रकार के विचार हमें परेशान करने लगते है। व्यक्ति इन्हें लाईलाज मानने लगता है। इनको सहज मार्ग की अनूठी पद्धती से दूर करने के सम्बन्ध में चर्चा की गई। साथ ही इन्हें दूर करने के लिए कार्यक्रम में मन और आत्मा के शुद्धिकरण रूपी गोल्डन की भी प्रदान की गई।

इस स्वर्णिम चाबी के प्रयोग से इन समस्त विकारों को निर्मूल नष्ट किया जा सकता है। कार्यक्रम में इसका प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों के चेहरे पर इन विकारों से मुक्ति का विश्वास नजर आया। नियमित अभ्यास से यह विश्वास आदत बन जाती है। इसी से हमारा सामाजिक, पारिवारिक, व्यावसायिक एवं आर्थिक जीवन क्लेश और तनाव से मुक्त हो जाता है।

उन्होंने कहा कि इस पद्धति के अनुसार मन और आत्मा के शुद्धिकरण करने से पहले दिन से ही प्रभाव नजर आने लगता है। व्यक्ति मन, शरीर एवं आत्मिक स्तर से स्वस्थ हो जाता है। इसे व्यक्ति स्वयं तथा उसके साथ रहने वाले परिजन महसूस कर सकते हैं। कुछ ही समय में उसके मन और आत्मा शुद्ध होकर नई आभा बिखेरते नजर आने लगते हैं।

इस दौरान ब्राईटर माईण्ड से प्रशिक्षित बच्चों ने अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया। उन्होंने आंखों पर पट्टी बांधकर दर्शको के सामने विभिन्न गेंदों के रंग बताए। साथ ही सामान्य पुस्तक में लिखे अक्षरों को ब्रेल लिपी के बिना पढ़कर बताया। इस बारे में ब्राईटर माईण्ड प्रशिक्षक शिमला भारद्वाज ने बताया कि यह कोई जादू नहीं है, बल्कि विज्ञान है।

प्रत्येक व्यक्ति के मस्तिष्क की कार्यक्षमता असीमीत है। वह केवल उसके कुछ भाग को ही काम में लेते हैं। ब्राईटर माईण्ड आपकी अन्तःप्रेरणा को जगाने को कार्य करता है। यह ब्रेन और हृदय के मध्य के समन्वय में वृद्धि करके हो जाता है। इससे आपकी अमूर्त और अवचेतन योग्यताएं मूर्त रूप लेकर सामने आने लगती है।

भारद्वाज ने बताया कि ब्रेन को पूर्ण विकसित करके उसका अधिकतम उपयोग करना व्यक्ति तथा माहौल पर निर्भर करता है। ब्राईटर माईण्ड ब्रेन की वर्जिस के माध्यम से उसके क्रिया कलापों में निखार लाता है। इससे व्यक्ति को अपनी असीमीत आन्तरिक क्षमताओं को बोध हो जाता है। व्यक्ति की अपनी छुपी हुई ऊर्जा की अनुभुति होने लगती है। इस कारण जिसे सामान्य भाषा में छठी इन्द्री कहते हैं वह आपका मार्गदर्शन करने लगती है।