सिरोही में सम्मान हुआ अपमानित, एसीबी के आरोपित सम्मानित, जान बचाने वाले को थप्पड-धक्के

sirohi police beating supporters of ranchhod dewasi in sirohi
sirohi police beating supporters of ranchhod dewasi in sirohi

सबगुरु न्यूज-सिरोही। राष्ट्रीय पर्व पर जिला स्तर पर सम्मान की गरिमा वैसे जिलेवासियों की नजर में गिरती जा रही है। लेकिन शुक्रवार को गणतंत्र दिवस पर तो इस सम्मान की गरिमा को जिला प्रशासन को पूरा ही धूल धूसरित कर दिया। जिला क्लेक्टर का दावा था कि जिला स्तरीय सम्मान समारोह में सम्मान पाने का मापदण्ड बहुत ही कडे कर दिए गए हैं।

तो आपको बता दें कि इस कडे मापदण्ड में सम्मानित होने के लिये भ्रष्टाचार का आरोप दर्ज होना भी शायद पहली महत्वपूर्ण  शर्त थी और सैंकडों लोगों की जान बचाकर प्रशासन कि मदद करने वाले को नजरअंदाज करना दूसरी। सिरोही मे प्रशासन ने भारतीय गणतंत्र को शर्मसार करते हुए भ्रष्टाचार के नामजद को सम्मानित किया, वहीं जिले में बाढ के दौरान अपने घर का एक-एक दाना लुटाकर 150 लोगों की जान बचाने वाले रणछोड रेबारी के सहयोगियो को पुलिस से थप्पड पडवाये और बंद गिरफ्तार करवाया।

रणछोड के अनुसार उसे जिला स्तरीय सम्मान के लिये सबसे ज्यादा धोखे में उन्हीं की जाति के सिरोही विधायक और गोपालन मंत्री ओटाराम देवासी और सत्ताधारी दल के नेताओं ने धोखे में रखा। स्वतंत्रता दिवस के सम्मान में विपक्ष द्वारा सूदखोरों को सम्मानित करने का आरोप पहले ही लग चुका है।
जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के हाथो ऐसा कार्मिक सम्मानित हुआ जिस पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में एक करोड से ज्यादा की अनियमितता के जुलाई 2015 और  सितम्बर 2015 को दो अलग मामले दर्ज हैं। अरविन्द पेवलियन मे इस कार्मिक के नाम की घोषणा होते ही दर्शक दीर्धा और बाद मे शहर मे जिला प्रशासन और ईनाम के लिए बनी सलेक्शन कमेटी की कुनीयत और विवेक् पर सवाल उठ गए थे। इत्तेफातक से इसके साथ एक और सम्मान को लेकर सेलेक्टर हास्य- व्यंग्य के पात्र बने, लेकिन उस सम्मान की घोषणा और सेलेक्शन जिला प्रशासन द्वारा नही दिया गया था।

एसीबी के जिस आरोपित को जिला कलक्टर ने अरविंद पेवेलियन में सम्मानित किया उसका नाम उनकी ओर से जारी पूर्व सूचना में था ही नहीं। आरोप ये लगा रहा है कि जिला सलेक्शन कमेटी ने संभवतः ऐसा जानबूझकर किया। पिछली मर्तबा इसी कार्मिक का नाम सूची में आने पर एसीबी के समस्त मामलों की एफआईआर जिला कलक्टर के समक्ष रख दी थी।जिला कलक्टर ने गंभीरता से रखते हुए सम्मान की गरिमा को बढाने के लिए इस कार्मिक का नाम सूची से तुरंत बाहर कर दिया।

हो सकता हो कि इस बार प्रशासन इस कार्मिक की एफआईआर का अंतिम प्रतिवेदन प्रशासन ले आया हो, लेकिन विधानसभा में प्रस्तुत जवाब में इन प्रकरणों की जांच जारी होने की जानकारी राज्य सरकार ने दी है। लेकिन परिवादियों का कहना है कि उन्हें एसीबी में दर्ज दोनो ही मामलो में अंतिम प्रतिवेदन पेश करने की की कोई जानकारी नबीन है, बल्कि एक मामले में तो एसीबी द्वारा जांच तेज करने की जानकारी भी मिलने का दावा उन्होंने पिछले सप्ताह किया था।

इस बार पूर्वसूचना के  जैसे ही इस कार्मिक का नाम बोला गया, वैसे ही जिला प्रशासन द्वारा जानबूझकर सम्मान को अपमानित करने की चर्चा चल पडी।
इधर, बाढ के दौरान जिला प्रशासन की लापरवाही और सूत्रों में प्रशासन के प्रति अश्विसनीयता कारण मायला जोड में फंसे 150 तीर्थयात्रियों की दो दिन तक सुध तक नहीं ली जा सकी।

एक 26 वर्षीय युवक रणछोड रेबारी ने इन लोगों को अपने गांव में ले जाकर दो दिन तक गांव में अंतिम दाना रहने तक खिलाया, अनाज खतम होने पर उन्हें पांच-पांच फीट उफनते पानी में रस्सी से बाहर निकालकर 150 लोगों को सुरक्षित पावापुरी भेजा। उसे इस बार आवेदन के बाद भी सम्मानित नहीं किया गया।

इतना ही नहीं जब उसने प्रशासन से इसके बारे में सवाल किए तो उसके सहयोगियों पर पुलिस टूट पड़ी और गिरफ्तार कर लिया गया।

इस सब मामले में सबसे ज्यादा कमजोर सिरोही के विधायक ओटाराम देवासी दिखे। अपने ही समाज के युवा की सुरक्षा तो दूर की बात उसके जुझारूपन को सम्मान तक नहीं दिलवा पाए, जबकि जैसा कि रणछोड ने बताया था कि ओटाराम देवासी ने 18 तारीख को जिला प्रशासन को इस बारे में बताया था।

संभवतः देवासी की कमजोरी को जानते हुए प्रशासन ने उनकी सिफारिश पर रणछोड को प्रशस्ति पत्र की जगह हाथापाई की और थाने में डाल दिया। इसी प्रशासनिक मशीनरी ने अतिवृष्टि के दौरान सिरोही के रेबारीवास से एक युवक को सिरोही की अर्बुद गोशाला में फंसी गायों को निकालने और इसके लिए लोगो की मदद मांगने का संदेश प्रसारित करने पर पिटाई करके गिरफ्तार कर लिया था।

रणछोड के साथ हुआ दुर्व्यवहार इस बात का प्रमाण है कि गोपालन राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, जिला प्रमुख, भाजपा जिलाध्यक्ष की तस्दीक की जिला प्रशासन की नजर में कोई प्रामाणिकता नहीं है क्योंकि रणछोड ने जिला प्रशासन में किए गए आवेदन में इनके लेटरपैड व हस्ताक्षर युक्त प्रशस्ति पत्र भी लगाए थे, जिन्हें शायद अविश्वसनीय मानकर रणछोड को सम्मान सूची से बाहर कर दिया गया।

वहीं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज भ्रष्टाचार के प्रकरणों को ज्यादा प्रामाणिक माना गया। वैसे इस बार भी रणछोड को सम्मनित नही किये जाने पर ओटाराम देवासी ने कहा था कि वह रणछोड को रेवदर में सम्मानित करवा देंगे, लेकिन उनकी यह दलील हास्यास्पद ज्यादा लगी। रणछोड ने सिरोही उपखण्ड में इन लोगों की जान बचाई, वह रहने वाला सिरोही उपखण्ड का है, इसके बावजूद सिरोही की बजाय रेवदर में उसका सम्मान करवाने का कहकर उन्होंने प्रशासन के सामने अपनी राजनीतिक कमजोरी को एक तरह से स्वीकार किया है।

देखिए क्या कहा रणछोड़ ने…