अजमेर महापौर ने किया संभाग स्तरीय विकास प्रदर्शनी का शुभारम्भ

अजमेर। अजमेर नगर निगम के महापौर धर्मेन्द्र गहलोत ने सोमवार को सूचना केन्द्र स्थित प्रदर्शनी दीर्घा में राजस्थान दिवस के कार्यक्रमों की श्रृंखला में जिला प्रशासन एवं सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग द्वारा तैयार की गई संभाग स्तरीय विकास प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया।

महापौर ने राज्य तथा जिले की उपलब्धियों एवं विकास से संबंधित प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर कहा कि राजस्थान की संस्कृति, विकास तथा विरासत को प्रदर्शित करने वाले इस प्रयास से आमजन एवं युवाओं को नई जानकारी प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विकास के क्षेत्र में किए गए कार्यों को एक स्थान पर देखा जा सकता है। उन्होंने प्रत्येक छाया चित्र को काफी गहनता से देखा तथा छाया चित्रों की सराहना की। इस मौके पर अजमेर सरस डेयरी द्वारा भी अपने उत्पादों की जानकारी एवं प्रदर्शन किया गया।

इस अवसर पर बीपी सारस्वत अध्यक्ष, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त केके शर्मा, अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर अरविंद कुमार सेंगवा, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी भगवत सिंह राठौड़, जनसम्पर्क विभाग के उप निदेशक महेश चन्द्र शर्मा, पर्यटन विभाग के उप निदेशक संजय जौहरी, जवाहर लाल नेहरू आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के मुख्य लेखाधिकारी मनोज शर्मा, भू जल संरक्षण विभाग के अधीक्षण अभियंता शरद गेमावत, पूर्व संयुक्त निदेशक जन सम्पर्क प्यारे मोहन त्रिपाठी अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। यह प्रदर्शनी आगामी 30 मार्च तक सुबह 10 से शाम 5 बजे तक आमजन के लिए खुली रहेगी।

संभाग स्तरीय मशाल दौड़, जगह-जगह हुई पुष्प वर्षा

अजमेर शहर ने सोमवार शाम अपने पलक पावड़े बिछाकर राजस्थान दिवस समारोह की संभागीय मशाल दौड़ को ऎतिहासिक बना दिया। संभाग स्तरीय मशाल दौड़ के दौरान शहर के लोगों में भारी उत्साह देखा गया। नगरवासियों ने मशाल दौड़ के रास्ते में पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। मशाल दौड़ में लोक कलाकार अपनी ही धून में नाचते गाते चल रहे थे। वहीं विभिन्न बैण्ड वादक अपने कौमी तरानों के साथ स्वर लहरियां बिखेर रहे थे।

मशाल दौड़ के माध्यम से राजस्थान की ऎतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक छटा सेे अजमेर शहर सराबोर हो गया। संभाग के सब जिलों ने एक रंग होकर संभागीय मशाल का निर्माण किया। सोमवार शाम संभागीय मशाल दौड़ का जो अजमेर जिले की राजकीय संग्रहालय से, भीलवाड़ा जिले की गांधी भवन से, नागौर जिले की चौपाटी से तथा टोंक जिले की मशाल दौड़ पुलिस लाइन चौराहा से शुरू हुई।

चारों दिशाओं के सभी रास्तों पर विभिन्न संगठनों स्वयं सेवी संस्थाओं, व्यापारिक एसोसिएशन, नागरिक जनप्रतिनिधियों ने मशाल का अभूतपूर्व स्वागत व अभिनंदन किया तथा पूरी सड़के गुलाब के फूलों से आच्छादित हो गई। नया बाजार व्यापारिक संघ, सिटीजन कौंसिल तथा प्राईवेट मोटर ऑनर एसोशियेशन ने इस दौड़ में विशेष सहयोग दिया। मशाल ठीक साढ़े पांच बजे शुरू हुई यह मशाल दौड़ भारत माता की जय व जय-जय राजस्थान के नारों से गूंज उठी।

अजमेर जिले की मशाल राजकीय संग्रहालय से आरंभ हुयी। मशाल को नगर निगम के महापोर धर्मेन्द्र गहलोत ने प्रज्ज्वलित किया। नागौर जिले की मशाल को सिटीजन्स कॉसिंल के महासचिव दीनबन्धू चौधरी तथा अतिरिक्त संभागीय आयुक्त केके शर्मा ने रवाना किया। भीलवाड़ा जिले की मशाल को महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक अनुपमा टेलर ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। टौंक जिले की मशाल को अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा ने हरी झण्डी ने दिखाई।

अजमेर के सुप्रसिद्ध बैण्ड जितेन्द्र बैण्ड, प्रसिद्ध राजस्थान बैण्ड, सम्राट बैण्ड, राहुल बैण्ड, कृष्णा बैण्ड, हीरा बैण्ड, हीना बैण्ड, संतोष बैण्ड, जय अम्बे बैण्ड, भारत बैण्ड, विनायक बैण्ड एवं पुलिस बैण्ड ने अपनी सेवाओं से पूरे संभाग में अपनी छाप छोड़ दी।

पूरे पटेल मैदान के चारों द्वार पर चारों जिलों से आए कलाकारों के जत्थे ने जिस उत्साह और उमंग के साथ अपने कार्यक्रम प्रस्तुत किए व देखते ही बनता था। मशाल में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों तथा सिविल डिफेंस के स्वयं सेवकों, हाडी़ रानी बटालियन, राजस्थान पुलिस के जवानों एवं राजस्थान स्पोटर्स कौंसिल अकादमी के एथेलेटिक्स ने बढ़चढ़कर भाग लिया।

सायंकाल 6.15 बजे चारों जिलों की मशाल को लेकर संबंधित जिलों से आयी मशाल ने एक साथ पटेल मैदान में प्रवेश किया तो पूरे माहौल को राजस्थानमयी बना दिया। रंग बिरंगी पोशाक पहने हाथ में डांडिया और अन्य वाद्य यंत्रों के साथ जिस जोश के साथ उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया शहर के उपस्थित नागरिकों ने इसे अभूतपूर्व बताया। इस अवसर पर कच्ची घोड़ी नृत्य लोक कलाकारों द्वारा अदभुत प्रदर्शन कर लोगों को अभिभूत कर दिया।

इस मौके पर नागौर के कैलाश निमावत के दल ने कच्छी घोड़ी, फाग एवं घूमर नृत्य प्रस्तुत किया। भीलवाड़ा के रमेश बुलिया के दल ने माण्डल की प्रसिद्ध गैर से रूबरू कराया। इसी प्रकार पीसांगन के धन्नालाल कुमावत ने भी प्रसिद्ध गैर नृत्य के माध्यम से सबका मन मोह लिया।