सुख और समृद्धि के प्रतीक दीपावली पर्व की धूम

जयपुर/अजमेर। राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित पूरे प्रदेश में बुधवार को सुख और समृद्धि का प्रतीक पर्व दीपावली परंपरागत तरीके से मनाया जा रहा है।

धन तेरस से शुुरु हुए इस पांच दिवसीय दीपावली के अवसर पर बाजारों में ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। धन तेरस के दिन जहां नए वाहन, बर्तन और जेवर आदि खरीदें जा रहे है वहीं अपने अराध्य देवों और लक्ष्मी पूजन के लिए सामग्री की खरीददारी ज्यादा हो रही है।

ग्राहकों को लुभाने के लिए बाजारों और दुकानों को विशेष रुप से सजाया गया है। पुराने शहर चार दीवारी के भीतर और आसपास के प्रमुख बाजारों जैसे राजापार्क, वैशाली नगर और उपनगर मानसरोवर में व्यापारियों और व्यवसायियों ने सामूहिक सजावट की है।

मिलावटी मावे की खबरों के बावजूद मिष्ठान की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखी जा रही है। इसके अलावा कपड़े और रेडीमेड वस्त्राें के शोरूम पर भी खासी भीड़ है।

इधर, राजनीतिक दलाें के कार्यालयों में इस असवर पर स्नेह मिलन और लक्ष्मी पूजन के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है। भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी महालक्ष्मी पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे, राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री वी. सतीश, प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी, प्रदेश महामंत्री (संगठन) चन्द्रशेखर और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, सहित अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर लक्ष्मी पूजन किया गया।

अजमेर में भी दीपावली की धूम देखी जा रही है। शहर के बाजारों खासी भीड उमडी है। लोग पूजन की परंपरागत सामग्री खरीदने में जुटे हैं। आगरा गेट पर गन्ने का बाजार सजा हुआ है। गली चौराहों पर फूल माला और पूजन सामग्री की अस्थाई थडियों पर जमकर ग्राहकी हो रही है।

दीपावली ही एक ऐसा पर्व है जिसे साल का सबसे बड़ा पर्व कहा जा सकता है। कार्तिक अमावस्या की काली रात को दीयों से उजाले में बदलने की यह परंपरा बहुत पुरानी है।

मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास काटकर तथा रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे। तब अयोध्यावासियों ने राम के राज्यारोहण पर दीपमालाएं जलाकर महोत्सव मनाया था। उसी परंपरा को आज भी हम मानते हैं और दीपावली पर दीये जलाकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम को याद करते हैं। कलयुग में सांसारिक वस्तुओं और धन का विशेष महत्व है।

मान्यता है कि इस युग में लक्ष्मी जी ही ऐसी देवी हैं जो अपने भक्तों को संसारिक वस्तुओं से परिपूर्ण करती हैं और धन देती हैं। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय कार्तिक अमावस्या को ही लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं, इसलिए इसी दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है।

दीपावली के दिन लक्ष्मी, गणेश की पूजा करने का विधान है। इसके साथ भगवान राम और सीताजी को भी पूजा जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि उनके पूजन के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है।

दीपावली धार्मिक कारणों से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी एक अहम पर्व है। ज्यादातर लोग इस दिन घर की पूरी सफाई और रंगाई करते हैं, जिससे जहां पूरे साल सफाई नहीं होती वहां भी सफाई हो जाती है।