अजमेर में एक दर्जन कौएं मृत पाए गए, पशुपालन विभाग अलर्ट

अजमेर। राजस्थान में कई स्थानों पर बर्ड फ्लू संक्रमण से कौओं की मौत के बाद आज अजमेर में भी करीब एक दर्जन कौएं मृत पाए गए जिसने संबंधित सरकारी विभागों की नींद उड़ा दी।

अजमेर की प्रसिद्ध आनासागर झील पर आज नौ मृत कौए पाए गए तथा गंज थाना क्षेत्र के पट्टीकटला क्षेत्र में भी तीन मृत कौएं मिलने से क्षेत्रवासियों मे संक्रमण की दहशत फैल गई। हालांकि अभी कौओं के मरने के वास्तविक कारणों का खुलासा नहीं हुआ है लेकिन पक्षी में बर्ड फ्लू संक्रमण की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में भी आनासागर बारादरी पर कई दिनों तक कौओं की मौत का सिलसिला चला था। उस दौरान भी सौ से ज्यादा कौएं अलग अलग दिन मौत के शिकार बने थे।

वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डा. आलोक खरे ने बताया कि 18 फरवरी वर्ष 2006 को महाराष्ट्र के नंदूरबार जिले के नवापुर गांव में सबसे पहले बर्ड फ्लू का प्रकोप हमारे देश में हुआ था। इस बीच पूरे देश में लगभग 40 रोग प्रकोप हो चुके हैं। किंतु राजस्थान राज्य में इसके प्रकोप की सूचना नहीं मिली थी।

लगभग 15 साल बाद अपने राज्य में बर्ड फ्लू का प्रवेश हो गया है। झालावाड़ जिले के राड़़ा जी में कौओं में बर्ड फ्लू के प्रकोप की पुष्टि हुई है। रोग की पुष्टि राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान, भोपाल द्वारा की जा चुकी है।

अजमेर जिले में मुर्गियों की संख्या काफी है। पोल्ट्री फार्म अधिक होने के कारण पशुपालन विभाग सतर्क है। विभाग ने पोल्ट्री फार्मिंग से जुड़े सभी लोगों से अपील है कि किसी भी क्षेत्र/गांव के किसी पोल्ट्री फार्म की मुर्गियों में या जंगली पक्षियों में आसामान्य/ अत्यधिक संख्या में मृत्यु होने की स्थिति में या खबर मिलने पर आवश्यक रूप से सूचित करें।

विभाग की कार्य योजना तैयार है और इस दौरान पोल्ट्री फार्मर को सजग रहने के लिए कह दिया गया है। फार्मर अपने फार्म पर बायो सिक्योरिटी के अनुसार साफ सफाई रखें। कीटाणु नाशक दवाओं का स्प्रे करते रहें। ज्ञातव्य है कि जंगली पक्षियों के लिए वन विभाग और मुर्गी पालन के विषय में पशुपालन विभाग को कार्यवाही की जानी अपेक्षित है।

पशुपालन विभाग ने उठाए एहतियाती कदम

राजस्थान में पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव कुंजी लाल मीणा ने कहा कि राज्य में एवियन इनफ्लूएन्जा को लेकर विभाग पूरी तरह सतर्क एवं सजग है ओर राज्य में मुर्गीपालन से जुड़ें मुर्गीपालकों को वर्तमान में चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं है।

मीणा आज यहां पशुधन भवन में आयोजित बैठक में झालावाड में एवियन इनफ्लूएन्जा से हुई कौओं की मृत्यु की पुष्टि के दृष्टिगत राज्य में मुर्गीपालन व्यवसाय की सुरक्षा को लेकर विभागीय स्तर पर एहतियात के तौर पर की गई तैयारी की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में कौओें में मृत्यु के कारण जानने के लिये राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल को भेजे गये सैम्पल में कौओें में एवियन इनफ्लूएन्जा से मौत की पुष्टि हुई है। पशुपालन विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्र में स्थानों को चिन्ह्ति कर मृत पक्षियों के शवों का वैज्ञानिक रूप से निस्तारण किया जा रहा है तथा बीमार पक्षियों का उपचार हेतु पशुपालन विभाग एवं वन विभाग की विशेष देखरेख में रखा जा रहा है।

मीणा नेे बताया कि प्रदेश मे अब तक झालावाड मे 100, कोटा मे 47, बांरा में 72, पाली में 19, जोधपुर मे 7 तथा जयपुर जलमहल में 7 सहित कुल 252 कौवो की मौत की सूचना प्राप्त हुई है। जोधपुर, कोटा, बारां एवं जयपुर में मृत कौओं के शव व अन्य नमूने एवियन इनफ्लूएन्जा संदर्भ प्रयोगशाला, भोपाल को रोग की पुष्टि हेतु भिजवाए गए हैं।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक मोहन मीणा ने अवगत कराया कि कौओें में हो रही असामान्य मृत्यु की स्थिति से निपटने के लिए वन एवं पशुपालन विभाग के कर्मियों द्वारा आपसी सामंजस्य एवं सहयोग से कार्य किया जा रहा है।

पक्षियों की अप्राकृतिक मृत्यु के बाद बीकानेर में सतर्कता

राजस्थान में कोटा, झालावाड़, जोधपुर, नागौर, पाली जिलों में पक्षियों (कौआ) की अप्राकृतिक मृत्यु के बाद और बर्ड फ्लू की आशंका के चलते बीकानेर में भी सतर्कता बरती जा रही है। वन्यजीव उप वन संरक्षक वीरेंद्र सिंह जोरा ने बताया कि बर्ड फ्लू की आशंका को देखते हुए जिला स्तर पर कंट्रोल रुम की स्थापना की गई है।

जिले में पूरी बरते हुए अधीनस्थ विभागीय अधिकारियों और कार्मिकों को सतर्क किया गया है साथ ही आमजन पर्यावरण एवं पक्षियों से जुड़े गैर सरकारी संस्थाओं एवं व्यक्तियों को भी अपील की गई है कि कहीं भी इस तरह पक्षियों की अप्राकृतिक मौत पाए जाने पर वे तत्काल प्रभाव से समीपस्थ अधिकारियों को या कंट्रोल रुम को सूचित करें।

हाल ही में पांचू पंचायत समिति के गांव पांचू में चार कौवों की अप्राकृतिक मौत पर विभाग ने शीघ्र कार्यवाही शुरु की है एवं पशु चिकित्सकों की सहायता से विसरा.सैम्पल एकत्रित कर जांच हेतू भेजे जाने की कार्यवाही की जा रही है।