देश में भेदभाव को दूर कर बच्चोें की शिक्षा एक समान होनी चाहिए: रघु ठाकुर

देश में भेदभाव को दूर कर बच्चोें की शिक्षा एक समान होनी चाहिए: रघु ठाकुर
देश में भेदभाव को दूर कर बच्चोें की शिक्षा एक समान होनी चाहिए: रघु ठाकुर

भिंड | लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक रघु ठाकुर ने कहा कि देश में समाज व्यवस्था के कारण उत्पन्न हुए भेदभाव को दूर कर बच्चोें की शिक्षा एक समान होनी चाहिए, चाहे वह बच्चा देश के ऊंचे पद पर बैठे किसी व्यक्ति का हो या फिर सबसे छोटे कर्मचारी का।

ठाकुर ने कहा कि भेदभाव का ही परिणाम है कि समाज का एक बडा हिस्सा शिक्षा से वंचित रहा। एक प्रकार की अयोग्यता उन पर थोप दी गई। जिसे हम लोग आज पिछडा और दलित वर्ग के नाम से जानते हैं, लेकिन समाजवादी डॉ.राममनोहर लोहिया का सपना था कि राष्ट्रपति और चपरासी के बच्चों की शिक्षा एक समान होना चाहिए। लेकिन वर्तमान में ऐसा होता नहीं दिख रहा है।

उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान को कोई अंग्रेज गुलाम नहीं बना पाता, हिंदुस्तान यदि गुलाम बना है तो जातीय भेदभाव के नाम पर। इस गुलामी के लिए समाज के लोग ही जिम्मेदार है। देश को यदि फिर से गुलामी की ओर नहीं ले जाना है और आजाद रखना है, तो पिछडों को आरक्षण देना होगा। केंद्र सरकार अगर आरक्षण खत्म करना चाह रही है। तो हम इसके लिए तैयार हैं। इसके लिए सबसे पहले जातीय भेदभाव खत्म करो। उसके बाद आरक्षण खत्म की बात होनी चाहिये।

उन्होंने कहा कि जब तक बराबरी का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक आरक्षण खत्म नहीं हो सकता, पहले बराबरी की भागीदारी तो दो, तब आरक्षण खत्म करने की बात हो। पिछडे वर्ग के लोगों को भी अपने बीच के कमजोर और गरीब लोगों को न्याय देने के लिए तैयार रहना चाहिए ताकि सामाजिक न्याय आखिरी व्यक्ति तक पहुंच सके। देश के पहले पिछड़े वर्ग आयोग ने जिसके सभापति काका साहब कालेकर थे। जिन्होंने पिछड़ी जातियों को 40 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उसे अमान्य कर दिया था।

लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी द्वारा जिले के अटेर क्षेत्र के ग्राम पुर में कल पिछड़ा वर्ग जागृति सम्मेलन का आयोजन किया गया था। सम्मेलन में रघु ठाकुर ने ग्राम पुर में हायर सेकेंडरी स्कूल एवं डिग्री कॉलेज खोलने की मांग शासन से करते हुए कहा कि पुर जो बड़ी आबादी का गांव हैं। यहां हायर सेकेंडरी स्कूल तक नहीं है। बच्चियों को आगे पढ़ने की व्यवस्था नहीं है और इसके परिणाम स्वरूप पुर और आसपास के गांव के छात्र-छात्राएं योग्यता के आधार पर भी आगे की पढ़ाई नहीं कर पातीं।