शिक्षा प्रणाली ऐसी हो जो ज्ञानी, गुणी और संस्कारवान बनाने के साथ ही कर्मयोगी बनाये

शिक्षा प्रणाली ऐसी हो जो ज्ञानी, गुणी और संस्कारवान बनाने के साथ ही कर्मयोगी बनाये
शिक्षा प्रणाली ऐसी हो जो ज्ञानी, गुणी और संस्कारवान बनाने के साथ ही कर्मयोगी बनाये

टीकमगढ़ । देश के राष्ट्रीय संत आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने कहा है कि शिक्षा प्रणाली ऐसी होना चाहिए, जो बच्चों को ज्ञानी, गुणी और संस्कारवान बनाने के साथ ही कर्मयोगी बनाये। ऐसा होने पर बच्चे अपने देश का नाम रोशन करेंगे।

दिगंबर जैन संत आचार्यश्री मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ के पास धर्म क्षेत्र पपोराजी में ज्ञानोदय विद्यापीठ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कल आयोजित इस आयोजन में देश भर से आए लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण से सभ्यता और संस्कृति कमजोर होती जा रही है। इस मामले में संतुलन की जिम्मेदारी प्रगतिशील सोच के समाज और युवाओं की है।उन्होंने कहा कि शिक्षा का निजीकरण होने से समाज के सामने वर्तमान में तमाम समस्याएं आ रहीं हैं। पुरातन बहुउद्देशीय शिक्षाप्रणाली बच्चों को गुणवान तथा संस्करवान बनाती थी। इसके साथ ही वह रोजगारमूलक होती थी।

उस शिक्षा प्रणाली से समाज के अधिकांश लोगों को रोजगार मिलता था। उन्होंने कहा कि आज की प्रणाली सिर्फ 15 प्रतिशत युवाओं को रोजगार उपलब्ध करा पा रही है। देश को आज रोजगारमूलक शिक्षा के साथ ही युवाओं को स्वाबलंबी बनाना आवश्यक है।राष्ट्र संत ने बुंदेलखंड अंचल के मध्य में स्थित इस प्रकार की ज्ञानोदय विद्यापीठ की शुरूआत करने के लिए आयोजकों को आशीर्वाद दिया और विद्यापीठ के देश की शीर्ष संस्था बनने की कामना की।