यातायात सुरक्षा को लेकर इटावा पुलिस की अनोखी पहल

यातायात पुलिस ने मोटरसाइकिल सवार लोगों को हेलमेट प्रदान
यातायात पुलिस ने मोटरसाइकिल सवार लोगों को हेलमेट प्रदान

इटावा । सड़क हादसों के शिकार बाईक सवारों की बढती तादाद को रोकने के लिये उत्तर प्रदेश की इटावा पुलिस ने अनोखी पहल की है। पवित्र श्रावण मास में भगवान शंकर का रूप धरे एक व्यक्ति से मुफ्त हेल्मेट वितरण करा कर स्थानीय पुलिस लोगों को यातायात सुरक्षा का संदेश देने में जुटी है। पुलिस की इस अनोखी पहल का चंहुओर स्वागत किया जा रहा है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार त्रिपाठी की पहल पर शनिवार को शास्त्री चौराहे पर यातायात पुलिस ने मोटरसाइकिल सवार लोगों को हेलमेट प्रदान किए गए। इसके साथ ही लोगों से अपील की गई कि मोटरसाइकिल चलाने के दौरान हैलमेट लगाने से उनकी जान सुरक्षित रहेगी।

पुलिस और परिवहन विभाग अरसे से दो पहिया वाहन सवारों को उनकी सुरक्षा के लिए हेलमेट का प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर रहा था। चालान भी किए जा रहे थे, इसके बावजूद अधिकांश खासकर युवा वर्ग बगैर हेलमेट के फर्राटा भरते नजर आ रहे हैं। इससे पुलिस ने हार मानते हुए भगवान भोलेनाथ की शरण ली।

त्रिपाठी ने बताया कि दो पहिया वाहन सवारों को चेकिंग के दौरान निरंतर हेलमेट धारण करने के लिए समझाया जा रहा था। इसके बावजूद काफी संख्या में लोग बगैर हेलमेट के ही वाहन दौड़ाते नजर आ रहे हैं। इसके तहत यह प्रयोग किया गया है कि शायद भगवान में आस्था रखने वालों में हेलमेट धारण करने की सोच विकसित हो जाए।

इससे पहले इटावा मे ऐसा भी वाक्या देखा गया है कि पुलिस अफसर और कर्मी लोगों की जान बचाने की गरज से हैलमेट लगाने की पहल कर गुलाब का फूल भेंट करते हुए नजर आ चुके है। शहर के चौराहे पर पुलिस अधीक्षक नगर विनीत जायसवाल और पुलिस उपाधीक्षक डाक्टर अंजनी कुमार चतुर्वेदी गुलाब का फूल भेंट कर गांधीगिरी का एक ऐसा नायब नमूना पेश कर चुके है। जिसकी चर्चा पुलिस महकमे में तो हो ही रही है वही आम आदमी भी पुलिस के इस सार्थक पहल पर अपनी रायसुमारी करने में जुटा दिखाई दे हुआ नजर आ चुका है।

जैसे जैसे बेहतर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है और उन पर मोटरबाइक बड़ी तेजी पर लोग गुजारने में जुट गए हैं। ऐसे में बिना हेलमेट लगाए कई लोगों की सड़क हादसों में मौत के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस में इस तरह का निर्णय लिया कि जो लोग हेलमेट लगाकर के मोटर बाइक नहीं चलाते हैं उनके चालान करने के बजाए उनको गांधीगिरी के जरिए समझाने की पहल की जाए तो शायद उनके मन और मस्तिष्क में पुलिस के प्रति एक ऐसी भावना का जन्म हो जिसको लेकर के अभी तक नेगेटिव सोच बनी रही है।