ताजमहल के बजाय इटावा सफारी पार्क बन रहा सैलानियों की पसंद

इटावा। दुनिया के सात अजूबों में शुमार आगरा के ताजमहल को निहारने वाले सैलानियों को पड़ोसी शहर इटावा में चंबल के बीहड़ में बना ‘लाॅयन सफारी पार्क’ अब ज्यादा लुभा रहा है।

शनिवार काे नए साल के मौके पर भारी तादात में आसपास ही नहीं बल्कि दूर दराज के इलाकों से भी पर्यटक इटावा सफारी पार्क देखने के लिए पहुंचे। पार्क प्रबंधन की मानें तो इन सैलानियों में अधिकांश आगरा से ही आए लोग थे।

इटावा सफारी पार्क के उपनिदेशक अरूण कुमार सिंह ने बताया कि नव वर्ष के मौके पर कुल 3005 पर्यटक इस पार्क में आए। इनमें 421 बच्चे भी शामिल है। सैलानियों की आमद से लॉयन सफारी को एक ही दिन में 5.35 लाख रुपए की आमदनी भी हुई है।

उन्होंने बताया कि पिछले साल नए साल के मौके पर यहां आए पर्यटकों से लॉयन सफारी को आधी से थोड़ा अधिक, 2.92 लाख रुपए की ही आय हुई थी। सिंह का कहना है कि आगरा से करीब होने के कारण लॉयन सफारी का महत्व स्वत: बढ़ जाता है।

उन्होंने बताया कि ताजमहल में नए साल या अन्य अवसरों पर सैलानियों का भारी हुजूम उमड़ने के कारण आगरा और आसपास के लोग इस तरह के मौकों पर सैर सपाटे के लिए इटावा आना मुनासिब समझते हैं। सिंह ने कहा कि इस वजह से लॉयन सफारी का आकर्षण पहले की तुलना में अधिक बढ़ रहा है।

उन्होंने इस पार्क की अहमियत बते हुुए कहा कि इटावा लॉयन सफारी एशिया का एकमात्र ब्रीडिंग सेंटर है। इस कारण से एशियाई शेरों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सिंह ने बताया कि इटावा सफारी पार्क में 18 शेर है। इनमें से नौ इसी सफारी पार्क में पैदा हुए। शेर के अलावा यहां तीन भालू भी हैं। आगरा से लगभग एक दर्जन भालुओं के यहां आने का अभी इंतजार है।

आगरा निवासी सुनीता अग्रवाल, शनिवार को नए साल के मौके पर अपने दामाद, बेटी, बहू और बच्चों के साथ इटावा सफारी पार्क पहुंची। सुनीता ने बताया कि ताजमहल अब उनके लिए नई चीज नहीं रहा इसलिए वह परिवार के साथ इटावा लॉयन सफारी पार्क को देखने आये।

सुनीता की बेटी नीलम का कहना है कि ताजमहल भले ही दुनिया वालों के लिए अजूबा हो लेकिन आगरा में रहने के कारण ताजमहल को देखते देखते बोर होने लगे हैं। इसलिए उन्होंने इस साल लॉयन सफारी पार्क देखने का निर्णय लिया है। नीलम का कहना है कि उन्होंने परिवार के साथ लाॅयन सफारी में शेर, हिरन, भालू, आदि जानवरों को जंगल के माहौल में देखकर जमकर लुत्फ उठाया।

आगरा की ही निवासी रोशनी ने बताया कि लॉयन सफारी में दिन भर घूम फिर कर वे लोग शाम को समय से आगरा पहुंच सकते हैं। आगरा से उसी दिन घर वापसी करने लायक दूरी पर मौजूद होने के कारण लॉयन सफारी घूमना उनके लिये मुफीद साबित हुआ।

नए साल पर सैलानियों की संख्या अधिक होने के पूर्वानुमान को देखते हुए लॉयन सफारी पार्क प्रबंधन ने पर्यटकों को घुमाने के लिए 10 अतिरिक्त गाड़ियों का इंतजाम किया था। इसी लिहाज से यहां सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।

उल्लेखनीय है कि 25 नंबवर 2019 को सैलानियों के लिए खोला गया लॉयन सफारी की लोकप्रियता में खासा इजाफा हो रहा है। पूर्ववर्ती सपा सरकार में बनाए गए इटावा लॉयन सफारी पार्क का उद्घाटन एक जून 2017 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।

बता दें कि कुख्यात डाकुओं की शरणस्थली के रूप में बदनाम रही चंबल घाटी को पर्यटकों के लिए आबाद करने की मंशा से 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इटावा लॉयन सफारी परियोजना की शुरूआत कराई थी। प्रदेश में मायावती ने 2007 में सत्ता संभालने पर इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

इसके बाद 2012 में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने पर इस परियोजना का काम मई 2012 में शुरू किया गया। यह करीब 350 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। इटावा को पर्यटन मानचित्र पर लाने की गरज से बीहड़ में लाॅयन सफारी की स्थापना की रूपरेखा शुरू कराई थी। आज बीहड़ में स्थापित लॉयन सफारी भव्य रूप में दिखाई दे रहा है।