हर रविवार ये चौराहा खोलता है सिरोही कांग्रेस बोर्ड के कुप्रबंधन की पोल

गत 3 अक्टूबर को शहर के मुख्य सरजावाव दरवाजे पर नालियों ने सड़क पर बहता पानी।
गत 3 अक्टूबर को शहर के मुख्य सरजावाव दरवाजे पर नालियों ने सड़क पर बहता पानी।

सिरोही। जो सरजावाव दरवाजा भाजपा राज में लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय चुनाव और सामान्य धरनों में भाजपा सरकार की पोल खोलने के काम में आता था वो अब हर रविवार को सिरोही कांग्रेस के बोर्ड के कुप्रबंधन का ढोल पीटता है।

वो भी सुबह सुबह। ये वही दरवाजा है जहां से आवाज आती थी कि पूर्व एमएलए एंड कम्पनी ने सिरोही नगर में अव्यवस्थाओं का राज स्थापित कर दिया है। अब हर रविवार सोमवार सुबह ये कांग्रेस के उसी कुप्रबंधन की पोल खोलता है।

दो साल में ऐसे फैलाया सफाई का कुप्रबंधन

सिरोही में काँग्रेस बोर्ड के काबिज होने के बाद बोर्ड और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर सफाई व्यवस्था का जो कुप्रबंधन फैलाया वो रविवार सोमवार को सरजावाव दरवाजे पर जाम नालियों से चौराहे में फैलते गंदे पानी के रूप में नजर आ जाता है।

3 अक्टूबर के बाद 10 अक्टूबर को ये गंदगी देखने को मिली और ट्रेंड को देखते हुए लचर मोनिटरिंग के कारण आगामी 17 अक्टूबर को भी पूर्व एमएलए एंड कम्पनी को कोसने वाली कांग्रेस की अव्यवस्था देखने को मिल जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

सफाई आवश्यक सेवा है, लेकिन पिछले दो साल में कांग्रेस बोर्ड के काबिज होने के बाद जो अव्यवस्था फैली है उसकी वजह जनता की बजाय ठेकेदारों और कर्मचारियों के हित साधने की मंशा स्पष्ट दिख रही है।

इससे पहले कभी भी एक ही दिन सारे सफाई कर्मियों की छुट्टी की व्यवस्था नहीं थी। रोटेशन से छुट्टी की जाती थी। लेकिन, वर्तमान बोर्ड की अदूरदर्शिता और प्रशासनिक लापरवाही से हर रविवार को गंदगी फैले रहना साफ उजागर कर रहा है कि एक ही दिन सभी सफाई कर्मियों को छुट्टी दे दी जा रही है।

इससे हर रविवार को न सिर्फ सरजावाव दरवाजा बल्कि हर ट्रेचिंग भी गंदगी से अटी रहती है। अब तो कार्मिकों की हाजिरी के लिए लगाई सभापति और आयुक्त के चेम्बर  के पास लगी थम्ब इम्प्रेशन मशीन भी वहां नहीं दिखती।

सफाई ठेके से पारदर्शिता नदारद होने का मतलब क्या?

पूर्व में भी सफाई ठेकों में जमकर भ्रष्टाचार होने के आरोप नगर परिषद पर लगे। इस समय जब कांग्रेस और भाजपा ये आरोप लगाती थी तब ठेके पर सफाई व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाए गए कोई कायदे सिरोही नगर परिषद लागू नहीं करती थी। ये पारदर्शिता अभी भी नदारद है, तो सवाल ये उठता है कि क्या पुराना भ्रष्टाचार अब भी लागू है। सफाई व्यवस्था की बदहाली और सफाई ठेकों के दस्तावेजों को नगर परिषद द्वारा किसी को नहीं देना तो ये ही इशारा करता है।

दुकानदारों की ये आदत भी सबसे बड़ी समस्या

शहर में गंदगी की एक वजह राजमाता धर्मशाला रोड और बाजार के दुकानदार और सब्जी-फल विक्रेता भी हैं। नहर परिषद द्वारा मोटा खर्चा डस्टबिन ओर किया जाता है। ये कहाँ जाते हैं पता नहीं। रात्रि में घर जाते समय दुकानदार, फल व सब्जी विक्रेता कचरा डस्टबिन और ट्रेचिंग की बजाय सीधे नालियों में डालते हैं। ये सुबह सुबह समस्या पैदा करती है।

नगर परिषद इनको पाबंद करके सख्ती भी नहीं करती। व्यवस्थित नगर पालिकाओं में बाजारों में रात्रि में ही सफाई कर दी जाती है। सिरोही में गवर्नेन्स के नदारद होना तो ये ही बताता है कि सिर्फ लोगों ने व्यवस्था परिवर्तन के भ्रम में आकर चेहरे और पार्टी बदली है, लेकिन इन चेहरों और पार्टी की काम की प्रवृत्ति पूर्ववर्ती चेहरों और पार्टियों से अलग नहीं है।