पिता के दमदार किरदार को मिलती है भरपूर सराहना

पिता के दमदार किरदार को मिलती है भरपूर सराहना
पिता के दमदार किरदार को मिलती है भरपूर सराहना

मुंबई | बॉलीवुड के फिल्मकारों ने अपनी फिल्मों में पिता के किरदार को प्रभावशाली ढंग से कम ही पेश किया है लेकिन जब-जब पिता का दमदार किरदार सिल्वर स्क्रीन पर नजर आया है उसे दर्शकों की भरपूर सराहना मिलती है।

बॉलीवुड की फिल्मों में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन पिता के प्रभावशाली किरदार निभाने में महारत हासिल रखते है। पिता के दमदार भूमिका वाली उनकी फिल्मों में रवि चोपडा निर्देशित ‘बागवान’ खास तौर पर उल्लेखनीय है। इसके अलावा ऐसी भूमिका वाली उनकी फिल्मों में ‘इंद्रजीत’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘मोहब्बते’, ‘कभी अलविदा ना कहना’, ‘ सरकार’, एक रिश्ता द बांड ऑफ लव ‘वक्त’, ‘सरकार राज’ और ‘फैमिली’ शामिल हैं।

इतिहास के पन्नों को पलटने पर पता चलता है कि वर्ष 1951 में प्रदर्शित ‘आवारा’ में पृथ्वीराज कपूर ने पिता का रोबदार किरदार निभाया था। इस फिल्म में उन्होंने राजकपूर के पिता की भूमिका निभाई थी। पिता-पुत्र के आपसी द्वंद को प्रदर्शित करती फिल्म आवारा में दोनों दिग्गज कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। पिता के दमदार किरदार वाली पृथ्वीराज की फिल्मों में ‘मुगल-ए-आजम’ भी शामिल है जिसमें उन्होंने ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार के पिता की भूमिका निभाई थी।

इसके अलावा वर्ष 1971 में प्रदर्शित ‘कल आज और कल’ में उन्होंने एक बार फिर से राजकपूर के पिता की भूमिका निभाई। वर्ष 1982 में प्रदर्शित फिल्म ‘शक्ति’ में दिलीप कुमार ने पिता के किरदार को सशक्त तरीके से रूपहले पर्दे पर पेश किया। इस फिल्म में उन्होंने अमिताभ बच्चन के पिता की भूमिका निभाई थी जो फर्ज की खातिर अपने पुत्र को गोली मारने से भी नहीं हिचकता। इसी तरह वर्ष 1983 में प्रदर्शित फिल्म ‘मासूम’ में नसीरउद्दीन शाह ने जुगल हंसराज के पिता का भावात्मक किरदार निभाया था।