क़तर को विश्व कप मेजबानी देने के लिए अधिकारियों ने ली थी रिश्वत

न्यूयॉर्क। खतरनाक कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर में सभी खेल गतिविधियां ठप हो जाने के बीच अमरीका की एक अदालत ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि क़तर को 2022 विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट की मेजबानी देने के लिए कई अधिकारियों ने रिश्वत ली थी।

अमरीका की एक अदालत ने सोमवार को कहा कि ब्राजील फुटबॉल परिसंघ के पूर्व अध्यक्ष रिकार्डो टेक्सेरा, दक्षिण अमरीकी फुटबॉल के पूर्व बॉस दिवंगत निकोलस लियोज और जूलियो ग्रोंडोना सहित कई अधिकारियों ने 2010 में फीफा की कार्यकारी बैठक में क़तर की दावेदारी के पक्ष में मतदान करने के लिए रिश्वत ली थी।

ब्रुकलिन की जिला अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों में हालांकि यह नहीं बताया गया है कि यह धन कहां से आया था। फीफा ने गत नवम्बर में टेक्सेरा पर लाखों डॉलर की रिश्वत लेने को लेकर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था।

टेक्सेरा पर आरोप था कि उन्होंने 2006 से 2012 तक दक्षिण अमरीका की विभिन्न प्रतियोगिताओं के व्यावसायिक अनुबंध देने के लिए लाखों डॉलर की रिश्वत ली थी। उन पर 10 लाख स्विस फ्रैंक्स का भी जुर्माना लगाया गया था। हालांकि टेक्सेरा ने हाल में सीएनएन ब्राजील को एक साक्षात्कार में खुद के निर्दोष होने का दावा किया था।

दक्षिण अमरीकी फुटबॉल परिसंघ के पूर्व प्रमुख लियोज का पिछले वर्ष दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था जबकि 35 वर्षों तक अर्जेंटीना फुटबॉल परिसंघ का नेतृत्व करने वाले ग्रोंडोना की 2014 में बीमारी के चलते मौत हो गई थी।

अमरीकी अभियोजन पक्ष ने अपने अभियोग में उत्तरी अमरीका, मध्य अमरीका और कैरेबियन फुटबॉल परिसंघ (कॉनकोकाफ) के पूर्व अध्यक्ष जैक वार्नर पर रूस के पक्ष में 2018 विश्व कप के लिए वोट करने के बदले 50 लाख डॉलर की रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। अभियोग के अनुसार ग्वाटेमाला महासंघ के अध्यक्ष राफेल सेलग्वेरो ने रूस के पक्ष में वोट करने के बदले 10 लाख डॉलर की रिश्वत ली थी।

अमरीकी न्याय विभाग ने भ्रष्टाचार आरोपों की जांच 2015 में शुरू की थी जिसके बाद से कई शीर्ष अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।