पूर्वाचंल एक्सप्रेसवे: कम बोली लगाकर यूपीईआईडीए ने सरकार के बचाये 620 करोड़

पूर्वाचंल एक्सप्रेसवे: कम बोली लगाकर यूपीईआईडीए ने सरकार के बचाये 620 करोड़
पूर्वाचंल एक्सप्रेसवे: कम बोली लगाकर यूपीईआईडीए ने सरकार के बचाये 620 करोड़

लखनऊ । लखनऊ को गाजीपुर को जोडने वाले पूर्वाचंल एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईआईडीए) ने निजी कम्पनियों की अपेक्षा लागत से दस फीसदी कम कीमत की बोली लगाकर सरकार के लगभग 620 करोड रूपयों की बचत की है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 जुलाई को आजमगढ़ मे एक्सप्रेसवे का शिलान्यास करेंगे। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए तकनीकी और वित्तीय बोली लगायी गयी थी। इससे पहले वर्ष 2017 में समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के शासनकाल में इस एक्सप्रेसवे के लिए लगायी गयी बोली काे मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने रद्द कर दिया था।

यूपीआईडीए अध्यक्ष अवनीश अवस्थी ने मंगलवार को कहा की हमारी बोली अन्य कंपनियों से दस फीसद कम थी। हमारे प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट द्वारा आज मंजूर कर लिया जायेगा।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे मौजूदा सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है । सरकार इसका निर्माण कार्य 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले शुरू करना चाहती है। परियोजना काे आठ हिस्सों लखनऊ, बाराबंकी ,फैजाबाद , अम्बेडकरनगर, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ, मऊ और गाजीपुर में बांटा गया है। लखनऊ में, यह एनएच -56 के पास चंद सराई क्षेत्र से शुरू होगा। इसकी अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये है।

उन्होने बताया कि इलाहाबाद बैंक नौ प्रतिशत से कम ब्याज दर पर 12,000 करोड़ रुपये का ऋण देने पर सहमत हो गया है जिसका भुगतान तीन वर्ष बाद शुरू होगा। यह एक्सप्रेसवे 36 महीने से भी कम समय में पूरा हो जाएगा और टोल टैक्स से अर्जित धन का इस्तेमाल बैंक के ब्याज और मूल धन के भुगतान के लिए किया जाएगा।

एक्सप्रेसवे में सुल्तानपुर जिले के केदबाहर में 3000 मीटर लंबी हवाई पट्टी होगी जिसका उपयोग आपातकाल के समय भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों द्वारा किया जा सकता है। गौरतलब है कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक भूमि का 93 प्रतिशत पहले से ही खरीदा जा चुका है। अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश जारी किए गए हैं।