सुनील जाखड़ ने कांग्रेस पार्टी छोड़ते हुए आलाकमान को दी नसीहत

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पार्टी आलाकमान को उसके आसपास बैठे चाटुकारों की जमात से बचने की नसीहत देते हुए कहा है कि मौजूदा हालात में पार्टी की हालत को देखते हुए चिंतन के बजाय चिंता करने की ज्यादा जरूरत है।

पार्टी को गुडलक, गुडबाय कहते हुए जाखड़ ने कांग्रेस आलाकमान पर तंज कसते हुए कहा कि बेगैरत और चापलूस लोग तुम्हें मुबारक। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आसपास जो चापलूस बैठे हैं उनसे बचकर रहने और सच को सुनने की जरूरत है। यदि सोनिया गांधी ने ऐसे बेगैरत लोगों पर भरोसा न किया होता और पार्टी के लोगों को साथ लेकर चलतीं तो आज कांग्रेस की हालत ऐसी न होती।

उन्होंने कहा कि भांजे से पैसे मिले लेकिन कोई नोटिस नहीं और मेरे जैसे पार्टी के सच्चे सिपाही को चापलूसों के कहने पर नोटिस दिया। आलाकमान के नजदीक रहने वाली अंबिका सोनी ने पंजाब कांग्रेस पर कलंक लगा दिया जिसके चलते पंजाब विधानसभा चुनाव में करारी हार देखनी पड़ी।

पंजाब कांग्रेस के प्रभारियों की भूमिका निभाने वालों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यदि सोनिया गांधी और राहुल गांधी को दोस्त दुश्मनों की पहचान होती तो कांग्रेस का हालत कुछ और होती। मैं राहुल गांधी के कारण ही कांग्रेस में टिका रहा लेकिन उन्हें पार्टी के दोस्त दुश्मनों की पहचान नहीं। उनके आसपास बैठे कुछ लोग अपने स्वार्थ, हितपूर्ती कर रहे हैं और पार्टी रसातल में जा रही।

उन्होंने साफ लब्जों में कहा कि सोनिया जी पंजाब को बख्श दो। जो लोग पंजाब के लोगों, वहां की भौगोलिक स्थिति से वाकिफ नहीं, जिन्हें पंजाबियत तथा भाइचारे की समझ नहीं वे अपने फैसले पंजाब पर थोपते हैं जिससे हर वर्ग कांग्रेस से छिटता गया। यहां किसी धर्म तथा वर्ग के लोगों ने जातपात, रंग भेद की बनाई गयी सियासी लोगों की दीवार को तोड़ आम आदमी पार्टी को वोट दिया। कांग्रेस जिन नेताओं के नाम पर वोट लेना चाहती थी उन्हें पंजाब से बाहर के राज्यों में वोट के लिए क्यों नहीं भेजा।

उन्होंने कांग्रेस को लेकर भविष्यवाणी की कि कांग्रेस की यही हालत रही तो वो अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सकती। पार्टी टूट रही और उसका कोई भविष्य नहीं। दिल्ली में बैठे कांग्रेसियों को पंजाबियों का कोई पता नहीं। पंजाब की हार का असर दूर तलक जाएगा। उन्होंने सोनिया गांधी से आग्रह किया कि अकाल तख्त कोई छोटी चीज नहीं।

उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा की शुरूआत अंबिका सोनी से की और अंत भी सोनी से किया। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान के चापलूसों को जमकर धोया और पंजाब में कांग्रेस की हार का कलंक उनके माथे पर फोड़ा क्योंकि इन चाटुकारों ने आलाकमान को सच से दूर रखा और ऐसे फैसले पंजाब पर थोपे जो किसी को हजम नहीं हो रहे थे लेकिन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मन मसोस कर उनसे इंकार नहीं किया लेकिन उन्हें उनके मकसद मेंं सफलता नहीं मिली और पंजाब भी अन्य राज्यों की तरह कांग्रेस के हाथ से फिसल गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मूल दिक्कत यह है कि वह अपनी चाल ही भूल गई।

सुनील जाखड़ के छिटकने से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का छलका दर्द

पंजाब के लोकप्रिय नेताओं में शुमार सुनील जाखड़ के शनिवार को कांग्रेस को गुडलक तथा गुडबाय कहने पर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ने हाईकमान को नसीहत दी कि कांग्रेस को सुनील जाखड़ को नहीं गंवाना चाहिये क्योंकि वह पार्टी के लिये बेशकीमती हैं।

सिद्धू ने आज यहां कहा कि जाखड़ जैसे नेता को कांग्रेस नहीं छोड़नी चाहिए। मतभेद तो मिल बैठकर दूर किये जा सकते हैं लेकिन ऐसे नेता को खोना सही नहीं। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मंत्री राजकुमार वेरका ने आलाकमान को सलाह दी कि ऐसे नेता का पार्टी से अलग होना शुभ शगुन नहीं।

पार्टी के हालात को देखते हुए राहुल गांधी का सभी के हाथ पकड़कर चलने की जरूरत है न कि गैरों के पैर पकड़कर चलने की जरूरत। ऐसे समय में जब पार्टी की नैया डूबती जा रही हो तो सोचने की जरूरत है। पार्टी को अपना चिंतन करने की जरूरत है।
कांग्रेेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने तो पत्रकारों के सवालों का जवाब इतने शब्दों में दिया कि हमें इस बात कोई इल्म ही नहीं तो कैसे उस पर टिप्पणी की जाए।

ज्ञातव्य है कि पंजाब कांग्रेस के टूटने के बाद अब उसमें अनुभवी तथा लोकप्रिय नेताओं का टोटा पड़ता देख कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता दबी जुबान से यह कह रहे हैं कि आलाकमान ने यदि समय पर कुनबे को बंटोरने का काम नहीं किया तो इसके दुष्परिणाम जग जाहिर हैं और अब पार्टी अपने पैरों पर खड़ी न हो सकेगी। कुछ नेता तो मुंह खोलने से अभी कतरा रहे हैं। वे जानते हैं कि पार्टी मेें सब कुछ ठीकठाक नहीं हैं।