राष्ट्रपति इमानुएल मैक्राें ने विश्व विजेताअाें काे किया सम्मानित

France President Emmanuel Macron Honour World Cup-winning squad

पेरिस। फ्रांस की सड़कों पर उतरे लाखों दर्शकों ने नारेबाजी, नाच गाने और ड्रम्स की गूंज के साथ अपनी विश्व चैंपियन टीम का जोरदार स्वागत किया जबकि राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने खिलाड़ियों के लिए विशेष समारोह आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया।

चैंप्स एलिसे में भारी तादाद में फुटबाल प्रशंसक सड़कों पर उतरे और घंटों के इंतजार के बाद अपनी फीफा चैंपियन टीम की स्वागत परेड में हिस्सा लिया और उसके चैंपियन बनने का जश्न मनाया। फ्रांस ने क्रोएशिया को 4-2 से हराकर रूस में आयोजित फुटबाल विश्वकप का खिताब अपने नाम किया है।

युवा फ्रांसीसी टीम के सभी खिलाड़ी स्वदेश लौटने के बाद एलिसी पैलेस पहुंचे जहां उन्होंने राष्ट्रपति मैक्रों और उनकी पत्नी के साथ राष्ट्रगान ‘ला मार्सिलेसे’ गाया। मॉस्को में अपनी टीम की हौसला अफजाई के लिए मौजूद रहे राष्ट्रपति ने 20 साल बाद फीफा ट्रॉफी स्वदेश लाने वाली अपनी टीम के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया था।

मैक्रों ने प्रेजीडेंशल पैलेस के बगीचे में टीम की मौजूदगी में पत्रकारों से कहा कि मैं अापका हम सभी को गौरवान्वित करने के लिए धन्यवाद करता हूं। आप कभी न भूलें आप कहां से हैं, वे सभी फ्रांसीसी क्लब जिन्होंने आपको तैयार किया है उनका भी आपकी जीत में योगदान है।

फ्रांसीसी मीडिया ने भी प्रमुखता से केवल अपनी टीम की खबर और खिलाड़ियों की उपलब्धियों का ही गुनगान किया। चैंपियन परेड के लिए चैंप्स एलिसे में विशेष इंतजाम किए गए थे जहां 300,000 से अधिक लोगों का जमावड़ा था और यहां रविवार को टीम की जीत के बाद से ही लोगों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया था। लोगाें ने राष्ट्रगान के साथ जगह जगह पटाखे जलाए और ड्रम्स बजाकर जश्न मनाया।

राष्ट्रध्वज के लाल, सफेद और नीले रंग के कपड़ों में सजी एक महिला ने कहाकि हमने रात को बहुत मजा किया और पूरे शहर में ही जश्न का माहौल है। हम बस चाहते हैं कि खिलाड़ियों को देख सकें। फ्रांसीसी मीडिया ने 1998 के बाद देश के दूसरे विश्व कप जीतने को ऐतिहासिक पल बताया।

फ्रांस में खुशी और जश्न का यह माहौल इसलिए और भी खास है क्योंकि देश पिछले वर्षाें से आतंकवादी हमलों से जूझ रहा है। वर्ष 2015 में आईएस आतंकवादियों की गोलीबारी में 140 लोगों की जान गई थी जिसमें पेरिस के बाटाक्लान थिएटर में ही 89 लोग मारे गए थे।