पर्यटकों के लिए 4 माह तक बंद रहेगा गिर अभयारण्य

Gir Sanctuary to close for tourists for 4 months from tomorrow

सासण गिर। दुनिया में एशियाई शेरों की एकमात्र निवासस्थली तथा गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में 1412 वर्ग किलोमीटर में फैले गिर राष्ट्रीय पार्क सह अभयारण्य (गिर वन) के 110 वर्ग किमी में बनाए गए पर्यटक क्षेत्र को कल से चार माह तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाएगा। चार माह की यह बंदी हर साल मानसून के दौरान 16 जून से 15 अक्टूबर तक रहती है।

इसके साथ ही गिर सोमनाथ जिले के सासण गिर से खुली जीप में आठ चुनींदा जंगली रास्तों के जरिये होने वाले सिंह दर्शन कार्यक्रम पर भी चार माह तक रोक रहेगी हालांकि निकटवर्ती देवलिया में वन विभाग के व्याख्या क्षेत्र (इंटरप्रेटेशन जोन) में मिनी बस के जरिये होने वाला तयशुदा क्षेत्र में जंगल भ्रमण का कार्यक्रम बदस्तूर जारी रहेगा।

एक वन अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 के प्रावधान के तहत मानसून, जो कि अधिकतर वन्यजीवों के लिए प्रजनन काल होता है, के दौरान चार माह तक गिर वन के पर्यटन क्षेत्र को बंद रखा जाता है।

गिर सोमनाथ, जूनागढ और अमरेली जिलों में 1400 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले गिर वन को हर साल मानसून के दौरान पर्यटकों के लोकप्रिय सिंह दर्शन कार्यक्रम (खुली जीप में घने जंगलों में जाकर शेरों को देखने का कार्यक्रम) को भी बंद कर दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि मानसून का मौसम शेरों और अन्य वन्यजीवों के लिए प्रजनन काल होने के कारण हर वर्ष ऐसा किया जाता है। इस दौरान सिंह दर्शन के लिए इस्तेमाल होने वाली कच्ची सडकें भी कीचडयुक्त हो जाती हैं जिन पर वाहनों का चलना दुष्कर होता है।

सिंह दर्शन के लिए हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक सासण गिर आते हैं जहां से उन्हें खुली जीप में जंगलों के अंदर ले जाया जाता है। द्वारका और सोमनाथ की यात्रा पर आये देशी विदेशी पर्यटक भी इस निकटवर्ती वन क्षेत्र में सिंह दर्शन का रोमांचक लुत्फ उठाते हैं। सिंह दर्शन के लिए साल दर साल पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो रहा है।

बंदी के चार माह के दौरान वन क्षेत्र में जरूरी मरम्मत समेत कई अन्य कार्य भी किए जाते हैं। इस दौरान वनकर्मी भूले भटके नवजात शावकों का बचाव कार्य भी करते हैं और उन पर नजर रखते हैं।

हर पांच साल पर होने वाली सिंह गणना के अंतिम संस्करण के दौरान मई 2015 में गिर वन में शेरों की कुल संख्या 523 आंकी गयी थी जो इससे पहले वर्ष 2010 की उनकी संख्या 411 से लगभग 27 प्रतिशत अधिक थी। इसके अनुसार सर्वाधिक 268 शेर जूनागढ, 44 गिर सोमनाथ, 174 अमरेली जिले में जबकि 37 सीमावर्ती भावनगर जिले में थी। कुल शेरों में 109 नर, 201 मादा तथा 213 शावक थे।