पीट-पीटकर हत्या के मामलों के संबंध में सरकार ने बनाई समिति

Government sets up high level committee to check mob violence, lynching

नई दिल्ली। देश के विभिन्न हिस्सों में पीट-पीटकर हत्या की बढती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए इन पर रोक लगाने के उपाय सुझाने के लिए सरकार ने केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है जो चार सप्ताह में अपनी रिपोर्ट एक मंत्रि समूह को सौंपेगी।

गृहमंत्री राजनाथसिंह ने सोमवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। इस बीच जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार समिति में न्याय विभाग के सचिव, विधि विभाग के सचिव, न्याय विभाग के सचिव, विधायी मामलों के विभाग के सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव शामिल होंगे।

समिति चार सप्ताह में गृहमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रि समूह को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इस समूह में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, विधि एवं न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत शामिल हैं। मंत्री समूह समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद प्रधानमंत्री को अपनी सिफारिशें सौंपेगा।

सरकार देश के विभिन्न हिस्सों में पीट-पीटकर हत्या की बढती घटनाओं पर पहले ही चिंता व्यक्त कर चुकी है और उसने इनकी निंदा की है। उसने संसद में भी कहा है कि वह कानून के तहत इस तरह की घटनाओं को नियंत्रित करने के प्रति वचनबद्ध है।

केंद्र का कहना है कि संविधान के अनुसार पुलिस और कानून व्यवस्था राज्यों के विषय हैं। राज्य सरकारें अपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण, कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों के जान माल की रक्षा करने के लिए जिम्मेदार है। उन्हें इसके लिए अपने क्षेत्राधिकार में कानून बनाने तथा उन्हें लागू करने का अधिकार है।

गृह मंत्रालय भी अपराधों पर काबू पाने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए समय समय पर राज्यों को परामर्श जारी करता है। पीट-पीटकर हत्या की घटनाओं के मामले में भी गत चार जुलाई को राज्यों को एक परामर्श जारी किया गया था। इससे पहले नौ अगस्त 2016 को भी गो रक्षा के नाम पर हुई घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए राज्यों के लिए परामर्श जारी किया गया था।

सरकार ने कहा है कि वह पीट-पीटकर हत्या की घटनाओं के बारे में उच्चतम न्यायाल के हाल के निर्देशों का सम्मान करती है। उसने राज्य सरकारों को परामर्श जारी कर भीड़-हिंसा और पीट-पीटकर हत्या की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है। राज्य सरकारों को सलाह दी गयी है कि वे इस मामले में उच्चतम न्यायालय के 17 जुलाई के निर्देशों का पालन करें।