संसद में विपक्ष को हंगामा करना पड़ेगा भारी, सरकार करेगी समिति का गठन

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार संसद सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों के हंगामा और शोर-शराबा से परेशान रही है। इन दिनों बजट सत्र चल रहा है। पिछले दिनों संसद में कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों के भारी हंगामे की वजह से कार्यवाही कई बार स्थगित भी करनी पड़ी है। यही नहीं जब कांग्रेसी सांसद शोर-शराबा करने से बाज नहीं आए तब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कांग्रेस के साथ सांसदों को निलंबित भी कर दिया था।

लेकिन अब संसद में विपक्ष को हंगामा करना भारी पड़ेगा क्योंकि केंद्र सरकार अब ‘लोकसभा समिति के गठन’ पर विचार कर रही है। इस समिति में सभी दलों के सदस्य शामिल होंगे। इस समिति के अध्यक्ष लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला होंगे। यह समिति लोकसभा से निलंबित किए गए सात सासंदों में से स्पीकर की टेबल से कागज उठाकर पढ़ने वाले सांसद को लोकसभा से बर्खास्त करने पर विचार करेगी।

सातों सांसदों को निलंबन करने के बाद भी लोकसभा अध्यक्ष नाराज हैं

2 मार्च से 5 मार्च तक लोकसभा में हंगामा करने वाले सांसदों को गुरुवार को लोकसभा से निलंबित कर दिया गया था। यह सभी सांसद कांग्रेस पार्टी के हैं। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, टीएन प्रतापन, डीन कुरियाकोस, आर उन्नीथन, माणिक टैगोर, बैनी बेहन्न और गुरजीत औजला को पूरे सत्र के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया था।

निलंबन के बावजूद लोकसभा में हंगामा करने वाले सांसदों के खिलाफ सत्तारूढ़ दल और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की नाराजगी कम नहीं हुई है। बिरला ने दूसरे दिन भी संसद की कार्यवाही का संचालन नहीं किया। अब हंगामा करने वाले जिम्मेदार सांसदों की लोकसभा से बर्खास्तगी को लेकर समिति का गठन किया जा रहा है।

इसी सत्र में मोदी सरकार को संसद में बजट पास कराना है

संसद के दोनों सदनों में दिल्ली हिंसा पर हंगामा जारी है, हालांकि संसद की कार्यवाही 11 मार्च तक स्थगित कर दी गई है। हंगामे की वजह से बजट सत्र के दूसरे हिस्से में कोई भी कामकाज नहीं हो पाया है। जबकि दोनों ही सदनों से विभिन्न मंत्रालयों की अनुपूरक मागों को पारित कराया जाना है।

इसको देखते हुए सरकार ने बजट सत्र में सभी मंत्रालयों की अनुदान मांगों को पारित करने के लिए ‘गिलोटिन’ का सहारा लेगी। सरकार को अप्रैल के पहले सप्ताह में बजट पारित कराना है, लिहाजा 16 मार्च को लोकसभा में गिलोटिन होगा। इस प्रकार केंद्र सरकार को राज्यसभा में विधेयक पारित कराने के लिए 15 दिन और मिल जाएंगे।

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार