जम्मू एंड कश्मीर में आठवीं बार लगा राज्यपाल शासन

Governor’s rule in Jammu and Kashmir : eight time so far, fourth time under NN Vohra

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ तीन साल से अधिक समय तक गठबंधन सरकार में शामिल भारतीय जनता पार्टी के अलग होने के बाद राज्य में 40 वर्षों के दौरान आठवीं बार राज्यपाल शासन लगा है।

भाजपा ने मंगलवार को पीडीपी से गठबंधन तोड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस्तीफा दे दिया था और राज्यपाल नागेन्द्र नाथ वोहरा ने राज्यपाल शासन लगाने की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वोहरा की सिफारिश पर अमल करते हुए बुधवार को जम्मू.कश्मीर में राज्यपाल शासन को मंजूरी दी।

वोहरा के कार्यकाल में चौथी राज्यपाल शासन लगा है। उन्होंने 28 जून 2008 को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल का कार्यभार संभाला था, पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी उन्हें राज्यपाल बनाये रखा गया। उनका दूसरा कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। उनके कार्यकाल में गुलाम नबी आजाद, उमर अब्दुल्ला, मुफ्ती मुहम्मद सईद और महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला।

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में पिछली बार किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। पीडीपी 28 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। भाजपा को 25 सीटें मिली थीं।
पीडीपी और भाजपा ने गठबंधन सरकार बनाई। पहले मुफ्ती मोहम्मद सईद की अगुवाई में पीडीपी और भाजपा गठबंधन सरकार बनी। यह सरकार एक मार्च 2015 से सात जनवरी 2016 तक रही।

इसके बाद सईद की मृत्यु के बाद आठ जनवरी 2016 से राज्य में चार अप्रेल 2016 तक 87 दिन राज्यपाल शासन रहा। फिर दोनों दलों में गठबंधन के बाद महबूबा मुफ्ती की अगुवाई में चार अप्रैल 2016 को गठबंधन सरकार बनी। इसने 19 जून 2016 तक सत्ता संभाली।

जम्मू-कश्मीर में सबसे पहले राज्यपाल शासन 26 मार्च 1977 को लगा। कांग्रेस ने शेख अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस सरकार से समर्थन वापस ले लिया और राज्यपाल शासन लगा जो 105 दिन तक रहा। इसके बाद विधानसभा चुनाव में अब्दुल्ला विजयी हुए और उनकी अगुवाई में सरकार बनी जो पांच साल तक चली।

राज्य में दूसरी बार राज्यपाल शासन छह मार्च 1986 को लगा और यह 246 दिन चला। कांग्रेस ने गुलाम मोहम्मद शाह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई। तीसरी बार लगा राज्यपाल शासन छह वर्ष से अधिक समय तक चला। उन्नीस जनवरी 1990 को राज्यपाल शासन लगा जो छह साल 264 दिन तक चला।

फारूक अब्दुल्ला ने जगमोहन मल्होत्रा को राज्य का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के विरोध में इस्तीफा दिया था। वर्ष 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल काफ्रेंस ने राज्य की सत्ता में वापसी की और फारूक अब्दुल्ला की अगुवाई में सरकार बनी।

चौथी बार राज्यपाल शासन की अवधि महज 15 दिन रही। राज्य विधानसभा के चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला और अब्दुल्ला ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रुप में बने रहने से इन्कार कर दिया। इस वजह से 18 अक्टूबर 2002 को राज्यपाल शासन लगाया गया। बाद में मुफ्ती मोहम्मद सईद को कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों ने समर्थन दिया और गठबंधन सरकार बनी। इस बार राज्यपाल शासन केवल 15 दिन रहा।

पांचवी बार राज्यपाल शासन 11 जुलाई 2008 को लगा और 178 दिन रहा। उस समय कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद की अगुवाई में सरकार थी लेकिन अमरनाथ जमीन विवाद की वजह से पीडीपी ने समर्थन वापस ले लिया और राज्यपाल शासन लगाना पड़ा।

बाद में नेशनल काफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला की अगुवाई में राज्य में पांच जनवरी 2009 को सरकार का गठन हुआ। उमर अब्दुल्ला को राज्य के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बनने का श्रेय मिला।

वर्ष 2015 में विधानसभा चुनाव में एक बार फिर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला और नौ जनवरी 2015 को त्रिशंकु विधानसभा की वजह से नौ जनवरी 2015 को राज्यपाल शासन लगाया गया। इसके बाद पीडीपी और भाजपा का गठबंधन हुआ और मुफ्ती मोहम्मद सईद की अगुवाई में एक मार्च 2015 को राज्य में नई सरकार सत्तारूढ़ हुई।

सईद की मृत्यु के दोनों दलों ने तुरंत फिर सरकार नहीं बनाई और आठ जनवरी 2016 को राज्यपाल शासन लगाया गया जो 87 दिन तक चला। बाद में दोनों दलों के बीच फिर सहमति बनी और महबूबा मुफ्ती की अगुवाई में सरकार बनी जिसका अंत मंगलवार 19 जून 2018 को हुआ। कोविंद के राज्यपाल वोहरा की राज्य में राज्यपाल लगाने की सिफारिश को स्वीकार करने के बाद जम्मू कश्मीर में आठवीं बार लागू हुआ।