ग्रेच्युटी, मातृत्व अवकाश बढ़ाने संबंधी विधेयक लोकसभा में पारित

gratuity, maternity leave Bill passed by parliament
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नई दिल्ली। निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने और मातृत्व अवकाश की अवधि मौजूदा 12 सप्ताह से बढ़ाने संबंधी ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) विधेयक, 2017 आज भारी हंगामे के बीच बिना चर्चा के लोकसभा में पारित हो गया।

श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने सदन में बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुरूप केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दी गई है। विधेयक में निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने का प्रावधान है।

उन्होंने बताया कि महिलाओं कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश की सीमा बढ़ाए जाने का भी विधेयक में प्रावधान है। मौजूदा सीमा 12 सप्ताह है और बढ़ी हुई सीमा के बारे में सरकार बाद में अधिसूचना जारी करेगी।

रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एनके प्रेमचंद्रन ने कानून को 1 मार्च 2016 से प्रभावी करने संबंधी संशोधन भी पेश किया, लेकिन उनका यह संशोधन सदन ने ध्वनि मत से अस्वीकार कर दिया। प्रेमचंद्र के दो अन्य संशोधन भी इसी रतह से अस्वीकार हो गए। सरकार की ओर से गंगवार के दो संशोधन सदन ने स्वीकार कर लिए। इसके अलावा कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी का एक संशोधन भी स्वीकार नहीं किया गया।

इससे पहले अलग-अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के हंगामे के बीच सदन के पटल पर जरूरी कागजात रखवाने के बाद अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने विधेयक पर विचार के प्रस्ताव की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक कर्मचारियों और महिलाओं के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है।

कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह महत्त्वपूर्ण विधेयक है और इस पर चर्चा बहुत जरूरी है। कांग्रेस तथा अन्य दल भी इस पर अपनी राय रखना चाहते हैं। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सदन में व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि विधेयक पर बहस हो सके।

महाजन ने कहा कि वह जानती हैं कि चर्चा होनी चाहिए, लेकिन विधेयक के जरिये किए जा रहे दोनों बदलाव जरूरी हैं। इसके बाद उन्होंने विधेयक पारित करने की प्रक्रिया शुरू की और शोर-शराबे के बीच ही विधेयक पारित कर दिया गया।