गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने दिया इस्तीफ़ा

गांधीनगर। गुजरात में आज एक बड़े और बहुत हद तक नाटकीयता भरे राजनीतिक घटनाक्रम में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने अचानक अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। राजभवन में अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को सौपने के बाद रूपाणी ने पत्रकारों कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से त्यागपत्र दिया है।

अब वह पार्टी में जो भी ज़िम्मेदारी मिलेगी उसे निभाएंगे। दो बार मुख्यमंत्री रहे रूपाणी ने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार भी प्रकट किया। ज्ञातव्य है कि अगले साल ही राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। रूपाणी के इस्तीफ़े को इससे जुड़ी सत्तारूढ़ भाजपा की चुनावी रणनीति से जोड़ कर देखा जा रहा है।

इस बीच, रूपाणी के उत्तराधिकारी को अब तक घोषित नहीं किया गया है। रूपाणी ने आज सुबह ही एक कार्यक्रम में शिरकत की थी जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वीडियो कानफ़्रेंसिंग के ज़रिए सम्बोधन किया था।

रूपाणी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बेहद क़रीबी माना जाता है। 65 वर्षीय रूपाणी ने अगस्त 2016 में हार्दिक पटेल की अगुवाई वाले पाटीदार आंदोलन के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती आनंदीबेन पटेल के इस्तीफ़े के बाद यह पद पहली बार सम्भाला था। 2017 के चुनाव में भाजपा के अपेक्षाकृत लचर प्रदर्शन के बावजूद उन्हें दूसरी बार भी मुख्यमंत्री बनाया गया था।

उनके आज मोदी के शिरकत वाले पाटीदार समाज के ही एक बड़े कार्यक्रम के अचानक बाद राज्यपाल आचार्य देवव्रत को इस्तीफ़ा सौपने को लेकर रजनीतिक हलकों में अटकलों का बाज़ार ग़र्म है। उस कार्यक्रम में राज्य के कई दिग्गज पाटीदार नेता मौजूद थे।

वैसे रूपाणी को पद से हटाए जाने की अटकलें पिछले कुछ समय से गुजरात में सुनी जा रही थीं। उनके उत्तराधिकारी के रूप में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के नाम को उछाला जा रहा था हालांकि उन्होंने इस बात को कई बार ख़ारिज किया था।

भाजपा के शीर्ष नेताओं ने हालांकि उनके उत्तराधिकारी के नाम के मामले में चुप्पी साध रखी है पर सूत्रों के अनुसार इस पद पर किसी पाटीदार नेता को लाए जाने की अधिक सम्भावना है। पार्टी प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में अगले साल होने वाले चुनाव को हर हाल में जीतना चाहती है। राज्य में राजनीतिक रूप से दबंग पाटीदार समाज को पारम्परिक रूप से भाजपा का बड़ा वोट बैंक माना जाता रहा है।

रूपाणी ने जब इस्तीफ़ा दिया तो उनके साथ गुजरात के तीन बड़े पाटीदार नेता केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और परशोत्तम रूपाला तथा उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल भी उपस्थित थे।

बताया जाता है कि रूपाणी के भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद और मोदी के क़रीबी माने जाने वाले सीआर पाटिल के साथ भी बहुत अच्छे सम्बंध नहीं रहे हैं।राजनीतिक हलकों में पाटिल और उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल को भी मुख्यमंत्री पद के एक सम्भावित उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है।