भारत के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक गौरव पुनर्स्थापित हो रहे हैं: मोदी

पावागढ़। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को गुजरात में पंचमहाल जिले के सुप्रसिद्ध तीर्थ धाम पावागढ़ की यात्रा पर पहुंच कर शास्त्र विधि के अनुसार पूजा के बाद पावागढ़ मंदिर में ध्वजारोहण कर कहा कि आज भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव पुनर्स्थापित हो रहे हैं।

मोदी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि आज सदियों बाद पावागढ़ मंदिर में एक बार फिर से मंदिर के शिखर पर ध्वज फहरा रहा है। ये शिखर ध्वज केवल हमारी आस्था और आध्यात्म का ही प्रतीक नहीं है। ये शिखर ध्वज इस बात का भी प्रतीक है कि सदियाँ बदलती हैं, युग बदलते हैं, लेकिन आस्था का शिखर शाश्वत रहता है।

आज भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव पुनर्स्थापित हो रहे हैं। आज नया भारत अपनी आधुनिक आकांक्षाओं के साथ साथ अपनी प्राचीन धरोहर और पहचान को भी उसी उमंग और उत्साह के साथ जी रहा है, कि हर भारतीय उस पर गर्व कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि स्वामी विवेकानंद जी मां काली के आशीर्वाद लेकर के जनसेवा से प्रभुसेवा में लीन हो गए थे। मां मुझे भी आशीर्वाद दे कि मैं और अधिक उर्जा के साथ, और अधिक त्याग और समर्पण के साथ देश के जन-जन का सेवक बनकर उनकी सेवा करता रहूं। मेरा जो भी सामर्थ्य है मेरे जीवन में जो भी कुछ पुण्य है वो मै देश की माताओं-बहानों के कल्याण के लिए देश के लिए समर्पित करता रहूं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले पावागढ़ की यात्रा इतनी कठिन थी कि लोग कहते थे कि कम से कम जीवन में एक बार माता के दर्शन हो जाएँ। आज यहां बढ़ रही सुविधाओं ने मुश्किल दर्शनों को सुलभ कर दिया है। पावागढ़ में आध्यात्म भी है, इतिहास भी है, प्रकृति भी है, कला-संस्कृति भी है। यहां एक ओर मां महाकाली का शक्तिपीठ है, तो दूसरी ओर जैन मंदिर की धरोहर भी है। यानी पावागढ़ एक तरह से भारत की ऐतिहासिक विविधता के साथ सर्वधर्म समभाव का एक केंद्र रहा है।

उल्लेखनीय है कि ध्वजारोहण के साथ पावागढ़ तीर्थ धाम का गौरवशाली इतिहास भी जुड़ा हुआ है। पंद्रहवीं शताब्दी में पावागढ़ पर हमला होने के बाद गत पांच सदियों से मंदिर का शिखर जर्जर अवस्था में था। अब इस शिखर को नए रंगरूप के साथ आधुनिक शैली में तैयार किया गया है।

सर्वप्रथम पावागढ़ पहाड़ की चोटी को विशाल कर बड़े परिसर की बुनियाद रखी गई। उसके बाद परिसर की पहली और दूसरी मंजिल पर अनुषांगिक सुविधाओं की व्यवस्था की गई। महाकाली माता के गर्भगृह में मूल स्थापन को यथावत रखते हुए संपूर्ण मंदिर को नया बनाया गया।

इसके अतिरिक्त, मुख्य मंदिर और चौक को भी विशाल बनाया गया है। माताजी के पुराने मंदिर में शिखर के ठीक ऊपर बनी दरगाह को समझौते के जरिए हटाकर नया शिखर बनाया गया, जिस पर ध्वजदंडक को पुनःस्थापित किया गया है।

अभी मंदिर में श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए विश्राम गृह, शुद्ध पेयजल, नए और सुविधा युक्त शौचालय के साथ ही स्ट्रीट लाइट की सुविधा खड़ी की गई है। इसके साथ ही मंदिर की पुरानी और उबड़-खाबड़ सीढ़ियों की स्थान पर बड़ी-चौड़ी और सुव्यवस्थित सीढ़ियों का निर्माण किया गया है। मांची से रोप-वे के अपर स्टेशन तक 2200 सीढ़ियों तथा अपर स्टेशन से दूधिया तालाब होकर माताजी के मंदिर तक 500 सीढ़ियों का नवनिर्माण किया गया है।

मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य लगभग 12 करोड़ रुपए की लागत से ट्रस्ट द्वारा संपन्न किया गया है। मंदिर के अलावा समग्र परिसर के विकास कार्यों के लिए किए गए लगभग 125 करोड़ रुपए के खर्च में से 70 फीसदी गुजरात सरकार के पवित्र यात्राधाम बोर्ड की ओर से और 30 फीसदी खर्च ट्रस्ट की ओर से किया गया है।

अतिथि गृह और मल्टी-लेवल पार्किंग का भी होगा निर्माण आगामी समय में यज्ञ शाला, दूधिया तालाब के पास बृहद भोजनशाला और श्रद्धालुओं-पर्यटकों के रात ठहरने के लिए भक्ति निवास सुविधा तथा छासिया तालाब के निकट से सीधे माताजी के मंदिर तक पहुंचाने वाली दो बड़ी लिफ्ट भी लगाई जाएगी।

इसके साथ ही पावागढ़ पर्वत पर माताजी के मंदिर के समग्र परिसर की प्रदक्षिणा करने के लिए दूधिया और छासिया तालाब को जोड़ने वाला प्रदक्षिणा पथ तैयार किया जाएगा। मांची के पास अतिथि गृह और मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। आसपास के पर्वतों पर वन विभाग के सहयोग से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करने की भी योजना है।