ज्ञानव्यापी : दैनिक पूजा के लिए दलील किसी भी अधिनियम द्वारा वर्जित नहीं

वाराणसी। उत्तर प्रदेश में वाराणसी की एक अदालत ने गुरुवार को कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर शिवलिंग जैसी संरचना की रोजाना पूजा की अनुमति के लिए दायर याचिका पर कोई रोक नहीं है और इसलिए यह विचारणीय है।

इसके साथ ही अदालत ने मस्जिद इंतेजामिया समिति की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी)के आदेश 7 नियम 11 के तहत दायर याचिका को खारिज कर दिया।भगवान आदि विश्वेश्वर विराजमान और अन्य पक्ष के वकील अनुपम द्विवेदी ने बताया कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन) फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने अब सुनवाई की अगली तारीख 02 दिसंबर तय की है। उन्होंने कहा कि अदालत ने कहा कि मस्जिद समिति की ओर से दायर याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है।

उन्होंने बताया कि अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि वादी का मुकदमा आदेश 01 नियम 08, आदेश 07 नियम 03 और सीपीसी की धारा 9, पूजा स्थल विशेष प्रावधान, अधिनियम 1991, द वक्फ एक्ट 1995, उत्तर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एक्ट 1983 और द इंडियन लिमिटेशन एक्ट द्वारा वर्जित नहीं है।

अदालत ने कहा कि जहां तक 1936 के मुकदमे संख्या 62 दीन मोहम्मद और अन्य बनाम राज्य सचिव में न्यायिक मिसाल का संबंध है, सिविल जज, वाराणसी की अदालत ने 24 जुलाई, 1937 को निर्णय और डिक्री पारित की है।

इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों के तर्कों का विश्लेषण करने के बाद मैंने पाया कि वादी 1936 के दीन मोहम्मद और अन्य बनाम सचिव के वाद संख्या 62 में पक्षकार नहीं थे और मुकदमे में पक्षकार बनाने के उनके आवेदन को भी खारिज कर दिया गया था। इसलिए, डिक्री पारित की गई। उपर्युक्त मुकदमे का वादी या हिंदू समुदाय के खिलाफ बाध्यकारी प्रभाव नहीं हो सकता है और पूजा के उनके अधिकार को उपरोक्त आदेश के बल पर पराजित नहीं किया जा सकता है।

अदालत ने कहा कि प्रतिवादी संख्या 4 (इंतेज़ामिया समिति) द्वारा आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत दायर आवेदन 37 सी को खारिज कर दिया गया है। लिखित बयान दर्ज करने और मुद्दों को तैयार करने के लिए 2 दिसंबर को रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि आदि विशेश्वर विराजमान, अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य याचिका में वादी किरण सिंह विसेन ने ज्ञानवापी मस्जिद के वज़ूखाने के अंदर पाए जाने वाले शिवलिंग जैसी संरचना की दैनिक पूजा की अनुमति मांगी है। साथ ही यह निर्देश भी मांगा है कि यह स्थान हिंदुओं को सौंप दिया जाए और परिसर में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए।