हल्द्वानी : महिला से यौन संबंध बनाने के चक्कर में दरोगा फंसा, मुकदमा दर्ज

नैनीताल। उत्तराखंड में हल्द्वानी के मुखानी थाना प्रभारी दीपक बिष्ट ने अपने लिए बिन बुलाए मुसीबत मोल ली है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस महकमे ने थाना प्रभारी को निलंबित कर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है।

दरअसल मामला हल्द्वानी के मुखानी थाना के एक महिला के यौन उत्पीड़न से जुड़ा हुआ है। महिला की ओर से यौन उत्पीड़न का आरोप एनएसयूआई के पूर्व जिलाध्यक्ष तरूण साह पर मढ़ा गया है। इस संबंध में मुखानी थाना में मामला दर्ज कराया गया है। मामले की अभी जांच चल रही है।

इस दौरान गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी तरूण साह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की अदालत ने आरोपी को जून में अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।

मंगलवार को इस मामले में उस समय मोड़ आया। पीड़ित महिला की ओर से अदालत के संज्ञान में मामला लाया गया कि मुखानी थाना प्रभारी दीपक बिष्ट पीड़िता को मामला वापस लेने के लिए विभिन्न प्रकार से दबाव बना रहा है। उससे यौन संबंध बनाने और पांच लाख रूपए की मांग कर रहा है। इस मामले के सुबूत मौजूद हैं।

पीड़िता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि उसने पुलिस महानिदेशक को भी शिकायत की लेकिन आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस महकमे से 24 घंटे के अदंर जवाबतलब किया। अदालत ने यह भी पूछा कि आरोपी दरोगा के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई है।

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और इसके बाद पुलिस हरकत में आई। आरोपी दरोगा के खिलाफ प्राथमिक जांच के साथ ही कल रात 8.45 मिनट पर अभियोग पंजीकृत कर लिया गया। साथ ही जांच रामनगर के पुलिस क्षेत्राधिकारी को सौंप दी।

दूसरी ओर आरोपी तरूण साह की अग्रिम जमानत पर भी आज अदालत में सुनवाई हुई। आरोपी की ओर से कहा गया कि उस पर लगाए गए आरोप गलत हैं। चार साल बाद अभियोग पंजीकृत कराया गया। अदालत के रूख से साफ है कि वह इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेगी। आरोपी के अधिवक्ता की मांग पर अदालत ने 22 जुलाई की तिथि नियत कर ली। अब अदालत इस दिन तय करेगी कि आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज करती है या नहीं।