पान मुख में चबाओ वीर हनुमाना, घोटा घुमाकर भगाओ कोरोना

हे! वीर हनुमान आप को तो धार्मिक ग्रंथों में वानर बताया गया है फिर भी आप ने मानव के परम कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। जंगलों गुफाओं और पेड़ों पर ही अपना जीवन गुजार देने वाले हे वानर जाति के परम वीर आपको मानवों ने अपने धर्म ग्रंथों में प्रमुख स्थान दिया है। आप ना होते तो उस त्रेता युग की कथा ना जाने क्या इतिहास लिखकर अपनी कथा को पूर्ण करती। हे वीर हनुमान जब राम बनवासी हो गए और उनकी पत्नी सीताजी का हरण हो गया तब आप उनसे मिले। जब सब को यह मालूम पडा कि सीताजी का हरण लंका नगरी के राजा रावण ने किया। उस वक्त लंका तक पहुंचकर सीताजी का पता लगाना भी मानव जाति के लिए एक भारी चुनौती बन गई थी।

ऐसे में हे वीर हनुमान, आप ने मुख में पान सुपारी इस काम को पूरा करने की उठाकर मुंह में डाली। इस चुनौती को स्वीकार कर आप किसी ना किसी तरह अनेक समस्याओं का अंत करते हुए रावण की लंका नगरी पहुंच गए। सीताजी को राम का समाचार दे दिया। रावण को यह अहसास कराने के लिए हे वीर हनुमान आपने उस लंका नगरी को उजाड़ना शुरू कर दिया। लंका नगरी के वीर योद्धाओं को मार कर रावण से भी सामना कर लिया।

आपने रावण को ललकारतें हुए कहा था कि अभी तक केवल लंका में आने और सीताजी को ढूंढने की ही पान सुपारी मुख में चबाई है नहीं तो मैं तुझे मारकर माता सीताजी को ले जाता और राम को सौंप देता। इसलिए हे रावण, तेरी लंका से अब में जा रहा हूं। वीर हनुमान वापस आकर राम को समाचार दे देते हैं। लंका युद्ध में भी वीर हनुमान ने राम व लक्ष्मण को भारी संकटों से निजात दिला कर अपने परम वीर होने का प्रमाण दे दिया।

संतजन कहते हैं कि हे मानव यह कलयुग है और देहधारी श्रीराम प्रत्यक्ष रूप से इस दुनिया में नहीं है तो फिर वीर हनुमान को भी कहां जरूरत पडी जो इस कोरोना महामारी को भगाएं। आज भी जिनके अंदर का राम जिंदा है और जो आदर्श व मर्यादा में जीते हैं तो निश्चित वह परम वीर हनुमान रूपी मन, व्यक्ति को मजबूत बनाकर हर संकटों का सामना करने के लिए शक्ति देता है।

धार्मिक पूजा अर्चना यह सब केवल आस्था और श्रद्धा के ही विषय है। आस्था और श्रद्धा हनुमान जी के जन्मोत्सव को मनाती हैं तथा उन्हें अरदास करती है कि हे वीर हनुमान जी हम पान का बीड़ा और सुपारी श्रद्धा से अर्पण करते हैं और निवेदन करते हैं कि इस कोरोना महामारी को अपना अपनें घोटे से भगाओ ओर हमारी रक्षा करों। यह सब हमारी आस्था तक ही रहेगा।

इसलिए हे मानव, इस कोरोना महामारी के संकट से जो लड रहे हैं वही सारे लोग वीर हनुमान जी की शक्ति जैसे ही हैं जो जगत की जनसंख्या रूपी राम के जीवन को बचाने में लगे हुए हैं और तुम्हें कह रहे हैं कि तुम मस्ती में मस्त होकर घर में बैठो बाहर मत निकलो तब ही हमारे प्रयासों से यह कोरोना महामारी संकट दूर होगा।

सौजन्य : ज्योतिषाचार्य भंवरलाल, जोगणियाधाम पुष्कर