हार्दिक पटेल को अनशन की अनुमति नहीं, घर पर करेंगे उपवास

Hardik Patel will not allow protest on Patidar Reservation Now Fasting at home
Hardik Patel will not allow protest on Patidar Reservation Now Fasting at home

अहमदाबाद। गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल के शनिवार से यहां प्रस्तावित आमरण अनशन को अब तक अनुमति नहीं मिली है।

उधर, हार्दिक पटेल ने दावा किया है कि उनके कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे तथा कांग्रेस नेता राजबब्बर शिरकत करेंगे। उनकी इन सभी से बात हुई है और वे 27 अगस्त से एक एक कर इसमें आएंगे।

इस बीच, गांधीनगर जिला प्रशासन ने भी उनके अनशन की अनुमति देने से शुक्रवार को इंकार कर दिया। उधर, हार्दिक ने आरोप लगाया है कि सरकार के इशारे पर उनके समर्थन के लिए गुजरात के अलग अलग हिस्सों से अहमदाबाद आने का प्रयास कर रहे उनके समर्थकों को पकड़ा जा रहा है।

इस बीच, हार्दिक के खिलाफ यहां रामोल इलाके में भाजपा के पार्षद परेश पटेल के घर पर हुए हमले से जुड़े मामले की सुनवाई आज जज की अनुपस्थिति के कारण टल गई। इस प्रकरण में राज्य सरकार ने उनके आचरण के चलते उनकी जमानत रद्द करने की अर्जी की है। हार्दिक ने इस मामले में जमानत की शर्त में सुधार का आग्रह किया है ताकि उन्हें मुकदमे की सुनवाई के दौरान रामोल इलाके में प्रवेश मिल सके।

सरकारी वकील सुधीर ब्रह्मभट्ट ने बताया कि इस अर्जी पर एडीजे चौहाण की अदालत में सुनवाई पूरी हो चुकी है। सरकार ने जमानत की शर्त भंग कर रामोल क्षेत्र में प्रवेश करने के चलते हार्दिक की जमानत रद्द करने की मांग की है। यहां सत्र अदालत में अब इस मामले में 27 अगस्त को फैसला आने की संभावना है।

हार्दिक ने आशंका जतायी थी कि सरकार किसानों की ऋण माफी, पाटीदार आरक्षण आदि की मांगों पर उनके अनशन कार्यक्रम को रोकने के लिए उनका जमानत रद्द करा सकती है पर ऐसा होने पर वह जेल में भी अनशन जारी रखेंगे।

वह यहां एसजी हाईवे के निकट स्थित अपने आवास पर शनिवार से अनशन करेंगे। उन्होंने पहले शहर के पाटीदार बहुल नारोल इलाके में इसके लिए स्थान की मांग की थी और बाद में राजधानी गांधीनगर के सत्याग्रह छावनी मैदान की मांग की थी पर प्रशासन ने इसकी मंजूरी नहीं दी। हार्दिक की समर्थक माने जाने वाली विपक्षी कांग्रेस पार्टी के 21 विधायकों ने भी सरकार से उनके कार्यक्रम को मंजूरी देने की मांग की थी।

उन्होंने सरकार के अहमदाबाद में निषेधाज्ञा लगाने के फैसले पर भी सवाल उठाया और कहा कि ऐसा उनके आंदोलन को विफल करने के प्रयास के तहत किया गया है।

इस बीच हार्दिक की पूर्व सहयोगी और अब सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल रेशमा पटेल ने आज दावा किया कि हार्दिक किसी तरह अपना नाम बनाए रखने के लिए यह शिगूफा छोड़ रहे हैं। उनके पास मुद्दों को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।