मानव तस्करी और बाल विवाह रोकने के लिए स्वयंंगसिद्ध योजना

मानव तस्करी और बाल विवाह रोकने के लिए स्वयंंगसिद्ध योजना
मानव तस्करी और बाल विवाह रोकने के लिए स्वयंंगसिद्ध योजना

कोलकाता | पश्चिम बंगाल पुलिस ने मानव तस्करी और बाल विवाह रोकने के लिए स्वयंंगसिद्ध नामक एक परियोजना शुरू की है। ‘स्वयंंगसिद्ध’ का अर्थ है ‘आत्मनिर्भर’।

यह परियोजना युवा लड़कियों और लड़कों को ज्ञान और कौशल के साथ सशक्त बनाने की कल्पना प्रदान करती है ताकि वे जानकार और सतर्क हों तथा विकल्प बनाने में सक्षम हों। साथ ही वे अपने अधिकारों के उल्लंघन और दुर्व्यवहार को लेकर संवेदनशील हों। इच्छुक छात्रों के साथ स्कूलों और कॉलेजों में स्वयंंगसिद्ध समूह का गठन किया गया है। ये समूह 12 और 21 साल के उम्र के छात्रों को मिलाकर गठित किए गए हैं। राज्य सरकार की बाल संरक्षण समितियां इन समूहों की निगरानी और मार्गदर्शन कर रही हैं।

कुल मिलाकर, 3,862 छात्र स्वयंगसिद्ध समूह बनाने के लिए आगे आए हैं, जिनमें से 69 प्रतिशत लड़कियां हैं और शेष 31 प्रतिशत लड़के हैं। ये समूह मानव तस्करी, बाल अधिकार, बाल विवाह के दुष्प्रभावों और अन्य छात्रों और उनके पड़ोसियों के साथ महत्वपूर्ण हेल्पलाइन संख्याओं पर जानकारी साझा कर रहे हैं। स्कूलों ने 200 शिक्षकों को सलाहकार के रूप में पहचान की है।