हरियाणा बजट: कोई नया कर नहीं, शिक्षा, स्वास्थय, सुरक्षा और स्वालम्बन पर जोर

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने वर्ष 2020-2021 के लगभग 1,42,343.78 करोड़ रूपए के आकार के बजट में जनता पर किसी नये कर का बोझ न डालते हुए इसमें शिक्षा, स्वास्थय, सामाजिक सुरक्षा और स्वालम्बन पर विशेष तौर पर जोर दिया है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, जिनके पास वित्त विभाग भी है, ने वर्ष 2020-21 बजट पेश करते हुए कहा कि यह चालू वित्त वर्ष के मुकाबले 7.70 प्रतिशत का वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने बताया कि अगले वित्त वर्ष में राजस्व प्राप्तियां चालू वित्त वर्ष के 77580.73 करोड़ रूपए संशोधित अनुमानों में 15.96 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 89964.14 करोड़ रूपए रहने का अनुमान है।

राजस्व प्राप्तियां और पूंजीगत प्राप्तियों को मिला कर अगले वित्त में कुल प्राप्तियां चालू वित्त वर्ष के 108203.33 करोड़ के मुकाबले 119751. 97 करोड़ रूपए तथा राजस्व घाटा अन्य सभी समवेशों के साथ प्रभावी तौर पर क्रमश: 8917.01 करोड़ रूपए के मुकाबले 7037.66 करोड़ रूपये रहने का अनुमान है। उन्होंने जनता की गाढ़ी कमाई पर लगे करों से भरने वाले सरकारी खजाने की एक एक पाई जनहित पर खर्च करने और फिजूलखर्ची पर रोकने की सरकार की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा भी चालू वित्त वर्ष के 23436.59 करोड़ रूपए में मामूली वृद्धि के साथ 25681.60 करोड़ रूपए रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट पूर्व सभी विधायकों तथा उद्याेग एवं सेवा क्षेत्र समेत अन्य सम्बंधित पक्षों से सलाह मश्विरा करने की नई परम्परा शुरू की है।

बेहतर वित्तीय प्रबंधन के चलते सरकार राजकोषीय घाटे को राज्य सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत के दायरे में रखने में सफल रही। वर्ष अगले वित्त वर्ष में सकल राज्य घरेलू उत्पाद(जीएसडीपी) का 2.73 प्रतिशत रहने तथा प्रभावी राजस्व घाटा 0.75 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सरकार अगले पांच वर्षों में राजस्व घाटे को शून्य पर लाने का प्रयास करेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बजट में कुछ परम्पराओं को तोड़ते हुए 132 योजनाओं का 46 योजनाओं में विलय तथा 18 योजनाओं को समाप्त कर दिया है। छह योजनाओं का अन्य विभागों में समावेश किया गया है।

उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, महिला कल्याण, कृषि, मत्स्य पालन, बागवानी और सिंचाई जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर बजट की तैमासिक खर्च का सीमा समाप्त कर दी है। ऐसे में इन योजनाओं को वर्षभर अब निबार्ध रूप से धन उपलब्ध होगा।