समालखा में 79वें निरंकारी संत समागम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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सतगुरु माता सुदीक्षा ने दिया जागृति का संदेश
समालखा (हरियाणा)। संत निरंकारी मिशन के 79वें वार्षिक संत समागम में तीसरे दिन देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी के बीच आध्यात्मिक चेतना, प्रेम और मानव एकता का संदेश दिया गया। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि वास्तविक जागृति केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार, विचारों और जीवन के प्रत्येक निर्णय में दिखाई देना चाहिए। हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रति प्रेम और विश्वास बनाए रखना ही सच्ची भक्ति की पहचान है।

समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित समागम में श्रद्धालुओं ने सतगुरु के दर्शन किए और सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक संदेश ग्रहण किया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, समर्पण और सेवा का वातावरण नजर आया। चार दिवसीय समागम का आयोजन 23 से 26 अक्टूबर तक किया जा रहा है, जबकि 27 अक्टूबर को गुरु वंदना का कार्यक्रम निर्धारित है।

परिस्थितियां बदलें, लेकिन परमात्मा पर विश्वास अडिग रहे

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि परमात्मा अटल सत्य है, जबकि मनुष्य की इच्छाएं और जीवन की परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं। अनुकूल समय में आस्था बनाए रखना आसान होता है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी विश्वास और प्रेम कायम रखना ही आध्यात्मिक दृढ़ता है।

उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान से प्राप्त जागृति व्यक्ति को जीवनभर सजग और सचेत रहने की प्रेरणा देती है। यह चेतना केवल सत्संग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि सामाजिक व्यवहार और व्यक्तिगत निर्णयों में भी दिखाई देनी चाहिए। किसी अन्याय के विरुद्ध खड़े होते समय व्यक्ति को अपने उद्देश्य की भी समीक्षा करनी चाहिए कि उसका प्रयास वास्तव में जनहित और भलाई के लिए है या उसके पीछे अहंकार, स्वार्थ अथवा दिखावे की भावना है।

सतगुरु माता जी ने विचारों में भिन्नता के बावजूद प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा के अंश को देखने और उसे अपनाने की भावना को निष्काम प्रेम का आधार बताया। उनके अनुसार, आध्यात्मिक जीवन का सार निराकार परमात्मा का निरंतर अनुभव करना और मानवीय मूल्यों को व्यवहार में उतारना है।

राजपिता रमित जी ने भी समझाया जागृति का महत्व

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के प्रवचनों से पहले निरंकारी राजपिता रमित जी ने जीवन में सकारात्मक सोच और जागरूकता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिन परिस्थितियों में बदलाव संभव है, उन्हें बेहतर बनाने के लिए प्रयास करना चाहिए। वहीं, जिन स्थितियों को बदला नहीं जा सकता, उन्हें सहजता से स्वीकार करने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर भौतिक जरूरतों और सुख-सुविधाओं को लेकर सजग रहता है, लेकिन अपनी आत्मा की वास्तविक आवश्यकता को नजरअंदाज कर देता है। परमात्मा की सर्वव्यापकता को पहचानना, अहंकार का त्याग करना और श्रद्धा, जिज्ञासा व समर्पण के साथ जीवन जीना ही वास्तविक आध्यात्मिक जागृति है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिया आशीर्वाद

समागम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी पहुंचे। उन्होंने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा सत्संग में सहभागिता की। इस दौरान हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार और विभिन्न क्षेत्रों के विधायक व जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

विशाल आयोजन में दिव्यांग संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखा गया। प्रवेश द्वारों पर व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई, ताकि उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में परेशानी न हो। उनके ठहरने, भोजन और पेयजल की सुविधाओं के साथ सत्संग देखने के लिए एलईडी स्क्रीन भी लगाई गईं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य सभी श्रद्धालुओं को समागम में समान रूप से भागीदारी का अवसर उपलब्ध कराना रहा।

120 बिस्तरों का अस्थायी अस्पताल, एम्बुलेंस भी तैनात

समागम परिसर में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए। आयोजकों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, परिसर में आठ एलोपैथिक और छह होम्योपैथिक डिस्पेंसरी के साथ 15 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र स्थापित किए गए। इसके अतिरिक्त एक कायरोप्रैक्टिक शिविर और आईसीयू सुविधाओं से युक्त 120 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल भी बनाया गया।

आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए मिशन की 12 और हरियाणा सरकार की 30 एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गईं। इनमें 15 वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस शामिल होने की जानकारी दी गई।

कायरोप्रैक्टिक शिविर में भारत और विदेशों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सेवाएं दीं। इसके अलावा ईएनटी, नेत्र रोग, बाल रोग, दंत चिकित्सा और मनोरोग सहित विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने श्रद्धालुओं को परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया।

चार स्थानों पर लंगर, 22 कैंटीनों में रियायती सुविधाएं

समागम स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए चार स्थानों पर सामुदायिक भोजन यानी लंगर की व्यवस्था की गई। यहां दिन-रात भोजन उपलब्ध कराया गया। अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए लोगों का एक साथ बैठकर भोजन करना समानता, भाईचारे और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को दर्शाता नजर आया।

इसके साथ ही परिसर में 22 कैंटीन संचालित की गईं, जहां रियायती दरों पर अल्पाहार, चाय, कॉफी और मिनरल वाटर उपलब्ध कराया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच भोजन, पेयजल, चिकित्सा और आवागमन संबंधी व्यवस्थाओं ने आयोजन को सुव्यवस्थित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।