डोनाल्ड ट्रम्प से कभी नहीं मिलेंगे ईरान के राष्ट्रपति : जाफरी

Head of Revolutionary Guards says Iranian president will never meet Donald Trump

लंदन। ईरान की शक्तिशाली सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तेहरान के साथ बातचीत की पेशकश को खारिज कर दिया है।

ईरान की फार्स समाचार एजेंसी से मंगलवार को बातचीत के दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी ने कहा कि ट्रम्प। ईरान उत्तर कोरिया नहीं है जो बैठक के लिए आपके प्रस्ताव को स्वीकार कर ले। आपके बाद बनने वाले अमरीकी राष्ट्रपति भी वो दिन नहीं देख पाएंगे।

इससे पहले सोमवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बिना किसी शर्त ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से मिलने की इच्छा व्यक्त की थी। ट्रम्प ने कहा कि ईरान परमाणु समझौते से अमरीका के अलग होने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए वह बिना किसी शर्त के ईरान के नेता से मिलने के लिए तैयार हैं।

अमरीकी राष्ट्रपति ने इटली के प्रधानमंत्री के साथ सोमवार को व्हाइट हाउस में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि यदि वे मिलना चाहते हैं तो मैं निश्चित रूप से ईरान के नेता से मिलूंगा। मुझे नहीं पता कि वे अभी तैयार हैं। मैंने ईरान परमाणु समझौते से अमरीका को अलग किया। वह एक बेतुका समझौता था। मुझे विश्वास है कि वे शायद मिलना चाहते हैं और मैं किसी भी समय मिलने के लिए तैयार हूं।

अमरीका के ईरान परमाणु समझौते से अलग होने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी तल्ख हुए हैं। मई में ट्रम्प ने इस अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से अमरीका के अलग होने की घोषणा की थी।

उल्लेखनीय है कि 22 जुलाई को ट्रम्प ने एक ट्वीट कर ईरानी राष्ट्रपति को चेतावनी देते हुए कहा कि अमरीका को कभी भी धमकी न दें अथवा आप ऐसे परिणामों का सामना करेंगे, जिससे अब तक इतिहास में कुछ ही पीड़ित हुए हैं। अब हम एक ऐसा देश नहीं हैं जो हिंसा और मृत्यु के आपके विक्षिप्त शब्दों के लिए खड़े रहेंगे। सचेत रहो।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी एक ट्वीट कर अमरीकी राष्ट्रपति को चेतावनी दी थी कि अमरीका ईरान के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीतियां न अपनाए अन्यथा ‘ईरान के साथ युद्ध नहीं महायुद्ध’ के लिए तैयार रहे।

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में ईरान ने अमरीका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत ईरान ने उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी।